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CrPC Section 91: दस्तावेज आदि पेश करने के लिए जारी समन से जुड़ी है CrPC की धारा 91

सीआरपीसी (CrPC) की धारा 91 (Section 91) दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के लिए समन का प्रावधान (Provision) करती है. आइए जानें कि सीआरपीसी की धारा 91 इस बारे में क्या जानकारी देती है?

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दस्तावेज पेश करने के लिए जारी समन से जुड़ी है धारा 91 दस्तावेज पेश करने के लिए जारी समन से जुड़ी है धारा 91
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दस्तावेज पेश करने के लिए जारी समन से जुड़ी है धारा 91
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता उन कानूनी प्रक्रियाओं (Legal procedures) को परिभाषित करती है, जिनका प्रयोग अदालत (Court) और पुलिस (Police) अपने काम के दौरान करती है. ऐसे ही सीआरपीसी (CrPC) की धारा 91 (Section 91) दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के लिए समन का प्रावधान (Provision) करती है. आइए जानें कि सीआरपीसी की धारा 91 इस बारे में क्या जानकारी देती है?

सीआरपीसी की धारा 91 1(CrPC Section 91)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Proced) की धारा 91 में दस्तावेज या अन्य सामान कोर्ट के समक्ष पेश करने के लिए समन जारी करने की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है. CrPC की धारा 91 के अनुसार-

(1) जब कभी कोई न्यायालय (Court) या पुलिस थाने (Police Station) का कोई भारसाधक अधिकारी (Officer in charge) यह समझता है कि किसी ऐसे अन्वेषण, जांच, विचारण, या अन्य कार्यवाही के प्रयोजनों (Investigation, inquiry, trial or other proceeding) के लिए, जो इस संहिता के अधीन (Under the code) ऐसे न्यायालय या अधिकारी (Court or Officer) के द्वारा या समक्ष हो रही हैं, किसी दस्तावेज या अन्य चीज (Document or other thing) का पेश किया जाना आवश्यक या वांछनीय (Necessary or desirable) है तो जिस व्यक्ति के कब्जे या शक्ति में ऐसी दस्तावेज या चीज के होने का विश्वास है उसके नाम ऐसा न्यायालय एक समन (Summon) या ऐसा अधिकारी एक लिखित आदेश (written order) उससे यह अपेक्षा करते हुए जारी कर सकता है कि उस समन या आदेश में उल्लिखित समय और स्थान पर उसे पेश करे अथवा हाजिर हो और उसे पेश करे.

(2) यदि कोई व्यक्ति, जिससे इस धारा के अधीन (Under the code) दस्तावेज या अन्य चीज (Document or other thing) पेश करने की ही अपेक्षा की गई है उसे पेश करने के लिए स्वयं हाजिर होने के बजाय उस दस्तावेज या चीज को पेश करवा दे तो यह समझा जाएगा कि उसने उस अपेक्षा का अनुपालन (Compliance with the requirement) कर दिया है.

(3) इस धारा की कोई बात (क) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (Indian Evidence Act, 1872) (1872 का 1) की धारा 123 और 124 या बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 (Bankers Book Evidence Act, 1891) (1891 का 13) पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी; अथवा (ख) डाक या तार प्राधिकारी की अभिरक्षा (Custody of postal or telegraph authority) में किसी पत्र, पोस्टकार्ड, तार या अन्य दस्तावेज या किसी पार्सल या चीज को लागू होने वाली नहीं समझी जाएगी.
 
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क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

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