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CrPC Section 143: सार्वजनिक उपद्रव रोकने के लिए मजिस्ट्रेट उठा सकता है ये कदम

सीआरपीसी की धारा 143 (Section 143) में सार्वजनिक उपद्रव की पुनरावृत्ति (Repetition Public Nuisance) या जारी रखने पर रोक लगाने लगाने की शक्ति (Stopping power) का प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल मजिस्ट्रेट (Magistrate) कर सकता है.आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 143 इस बारे में क्या बताती है?

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उपद्रव रोके जाने से संबंधित है ये धारा
उपद्रव रोके जाने से संबंधित है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उपद्रव रोके जाने से संबंधित है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में मजिस्ट्रेट की तमाम ऐसी शक्तियों (Power of Magistrate) के बारे में प्रावधान (Provision) किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल वह वक्त पड़ने पर कर सकता है. ऐसे ही सीआरपीसी की धारा 143 (Section 143) में सार्वजनिक उपद्रव की पुनरावृत्ति (Repetition Public Nuisance) या जारी रखने पर रोक लगाने लगाने की शक्ति (Stopping power) का प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल मजिस्ट्रेट (Magistrate) कर सकता है.आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 143 इस बारे में क्या बताती है?

सीआरपीसी की धारा 143 (CrPC Section 143) 
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 143 (Section 143) में बताया गया है कि मजिस्ट्रेट (Magistrate) सार्वजनिक उपद्रव की पुनरावृत्ति या जारी रखने पर रोक लगा सकता है. CrPC की धारा 143 के अनुसार, कोई जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) अथवा उपखंड मजिस्ट्रेट (Sub-Divisional Magistrate) या राज्य सरकार (State government) द्वारा इस निमित्त सशक्त (Strong cause) किया गया कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive magistrate) किसी व्यक्ति को आदेश दे सकता है कि वह भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) में या किसी अन्य विशेष या स्थानीय विधि में यथापरिभाषित (As defined in local law) लोक न्यूसेंस की न तो पुनरावृत्ति (Neither repetition of public nuisance) करे और न उसे चालू रखे.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 142: किसी जांच के लंबित रहने तक मजिस्ट्रेट दे सकता है ऐसा आदेश 

क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

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