scorecardresearch
 

CrPC Section 142: किसी जांच के लंबित रहने तक मजिस्ट्रेट दे सकता है ऐसा आदेश

सीआरपीसी की धारा 142 (Section 142) में जांच के लंबित रहने तक होने वाले व्यादेश के बारे में जानकारी दी गई है. चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 142 इस बारे में क्या कहती है?

X
जांच के लंबित रहने तक की प्रक्रिया से जुड़ी है ये धारा
जांच के लंबित रहने तक की प्रक्रिया से जुड़ी है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जांच के लंबित रहने तक की प्रक्रिया से जुड़ी है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में मजिस्ट्रेट की शक्तियों (Power of Magistrate) से संबंधित की कई प्रावधान (Provision) किए गए हैं. इसी प्रकार सीआरपीसी की धारा 142 (Section 142) में जांच के लंबित रहने तक होने वाले व्यादेश के बारे में जानकारी दी गई है. चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 142 इस बारे में क्या कहती है?

सीआरपीसी की धारा 142 (CrPC Section 142)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 142 (Section 142) में जांच के लंबित रहने तक व्यादेश का प्रावधान (Provision of injunction) किया गया है. CrPC की धारा 142 के अनुसार-

(1) यदि धारा 133 के अधीन आदेश देने वाला मजिस्ट्रेट यह समझता है कि जनता को आसन्न खतरे या गंभीर किस्म की हानि का निवारण करने के लिए तुरंत उपाय किए जाने चाहिए तो वह, उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया था, ऐसा व्यादेश देगा जैसा उस खतरे या हानि को, मामले का अवधारण होने तक, दूर या निवारित करने के लिए अपेक्षित है.

(2) यदि ऐसे व्यादेश के तत्काल पालन में उस व्यक्ति द्वारा व्यतिक्रम किया जाता है तो मजिस्ट्रेट स्वयं ऐसे साधनों का उपयोग कर सकता है या करवा सकता है जो वह उस खतरे को दूर करने या हानि का निवारण करने के लिए ठीक समझे.
 
(3) मजिस्ट्रेट द्वारा इस धारा के अधीन सद्भावपूर्वक की गई किसी बात के बारे में कोई वाद न होगा.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 141: आदेश को बेअसर करने की प्रक्रिया बताती है सीआरपीसी की ये धारा 

क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

ये भी पढ़ेंः

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें