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CrPC Section 139: मजिस्ट्रेट के पास होती है जांच के निर्देश देने की शक्ति, लागू होती है ये धारा

सीआरपीसी की धारा 139 (Section 139) में मजिस्ट्रेट की उस शक्ति के बारे में प्रावधान (Provision) किया गया है, जिससे वह स्थानीय अन्वेषण के लिए निर्देश देता है और विशेषज्ञ की परीक्षा कराता है. चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 139 इस बारे में क्या कहती है?

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मजिस्ट्रेट के आदेश की शक्ति से संबंधित है ये धारा
मजिस्ट्रेट के आदेश की शक्ति से संबंधित है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मजिस्ट्रेट के आदेश की शक्ति से संबंधित है ये धारा
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

Code of Criminal Procedure: दंड प्रक्रिया संहिता में न्यायलय (Court) और पुलिस (Police) के साथ-साथ सभी तरह के मजिस्ट्रेट की शक्तियों से जुड़े प्रावधान (Provision) भी मौजूद हैं. ऐसे ही सीआरपीसी की धारा 139 (Section 139) में मजिस्ट्रेट की उस शक्ति के बारे में प्रावधान (Provision) किया गया है, जिससे वह स्थानीय अन्वेषण के लिए निर्देश देता है और विशेषज्ञ की परीक्षा कराता है. चलिए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 139 इस बारे में क्या कहती है?

सीआरपीसी की धारा 139 (CrPC Section 139)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 139 (Section 139) में स्थानीय अन्वेषण (Local investigation) के लिए निर्देश देने और विशेषज्ञ की परीक्षा (Examination of an expert) करने की मजिस्ट्रेट की शक्ति (Power of Magistrate) को परिभाषित (Define) किया गया है. CrPC की धारा 139 के मुताबिक, मजिस्ट्रेट (Magistrate) धारा 137 या धारा 138 के अधीन किसी जांच के प्रयोजनों (Purposes of investigation) के लिए (क) ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसे वह ठीक समझे, स्थानीय अन्वेषण किए जाने के लिए निदेश दे सकता है, अथवा (ख) किसी विशेषज्ञ को समन (Summon the expert) कर सकता है और उसकी परीक्षा (Examination) कर सकता है.

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क्या है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.

 

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