scorecardresearch
 

'बेहतर जीवन की आशा खत्म हो गई...' पुणे में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्र ने की खुदकुशी

पुणे के दौंड में एमपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. छात्र का नाम मल्हारी नामदेव बारवकर है. मल्हारी दौंड तहसील के देउलगांव गाड़ा का रहने वाला है. इससे पहले एक और छात्र ने आत्महत्या कर ली थी.

Advertisement
X
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पुणे के दौंड तहसील में MPSC छात्र की आत्महत्या का दूसरा मामला
  • स्वप्निल लोनाकर की आत्महत्या के बाद दौंड MPSC के एक और छात्र ने की आत्महत्या

पुणे के दौंड में एमपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. छात्र का नाम मल्हारी नामदेव बारवकर है. वह मल्हारी दौंड तहसील के देउलगांव गाड़ा का रहने वाला है. इससे पहले एक और छात्र ने आत्महत्या कर ली थी.

जानकारी के अनुसार, 25 वर्षीय मल्हारी बारवकर एमपीएससी की प्री-परीक्षा की तैयारी कर रहा था. पहले उसने दो-तीन प्री-परीक्षा पेपर भी दिए. इनमें सफलता न मिलने से निराश होकर उसने आज फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मल्हारी एक गरीब परिवार से था. मल्हारी के पिता मजदूरी करते हैं. परिवार के सदस्यों ने जानकारी दी है कि मल्हारी ने डिप्रेशन के कारण आत्महत्या की है.

उसके परिजन को इस संबंध में मल्हारी का लिखा सुसाइड नोट भी मिला है. यवत थाने के पुलिस इंस्पेक्टर नारायण पवार ने भी मल्हारी के सुसाइड नोट की पुष्टि की है. उसने एक सुसाइड नोट में लिखा है कि "जो सपना मैंने अभी तुम्हें दिखाया था, मैं उसे पूरा नहीं कर सकता और मैं तुम्हारा उदास चेहरा भी नहीं देख सकता. आत्महत्या के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं. अति आत्मविश्वास, खोया हुआ आत्मविश्वास, भविष्य में कोई सकारात्मक तस्वीर नहीं. एक बेहतर जीवन की सभी आशाएं खत्म हो गई हैं. सॉरी."

Advertisement

मल्हारी पिछले साल से एमपीएससी परीक्षाओं को लेकर चल रही लड़ाई में भी सक्रिय था. इससे पहले 4 जुलाई को दौंड के केडगांव के स्वप्निल लोनकर ने आत्महत्या की थी. उस समय महाविकास अघाड़ी सरकार की भारी आलोचना हुई थी. 

विधानसभा में हुई काफी खींचतान

विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बाद जब सरकार जागी तो यह घोषणा की गई कि एमपीएससी परीक्षाओं की खींचतान को समाप्त करने के लिए एमपीएससी चयन समिति का गठन किया जाएगा, लेकिन यह कमेटी कागजों पर ही रह गई. चूंकि समिति ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की है, तो स्वप्निल लोनकर और मल्हारी बारवकर जैसे युवाओं का अधिकारी बनने का सपना चकनाचूर हो गया है. खास बात यह है कि स्वप्निल लोनकर की आत्महत्या मामले के बाद उसका नाम मेरिट में पास हुए छात्र के interview कॉल लिस्ट में नाम आया है.

Advertisement
Advertisement