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कंधार प्लेन हाईजैक: कहां हैं वो तीन आतंकी जिन्हें भारत सरकार ने छोड़ा था

प्लेन हाईजैक के बदले यात्रियों की जान बचाने के लिए भारतीय सरकार ने तीन आतंकियों मसूद अजहर, उमर शेख और अहमद जरगर को छोड़ा था. इस घटना के इक्कीस साल बाद आइए जानते हैं कि वो तीन आतंकी कहां हैं..

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विमान को आतंकवादियों ने हाइजैक कर लिया था
विमान को आतंकवादियों ने हाइजैक कर लिया था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कंधार प्लेन हाईजैक के बाद छोड़े गए थे तीन खूंखार आतंकी
  • सरकार ने मसूद अजहर, उमर शेख और अहमद जरगर को छोड़ा था

तारीख 24 दिसंबर 1999, दिन शुक्रवार. काठमांडू से दिल्ली के लिए उड़े आईसी 814 विमान को हथियारबंद आतंकवादियों ने हाइजैक कर लिया. इंडियन एयरलाइंस के इस विमान में 176 यात्री और 15 क्रू मेंबर्स सवार थे. इस प्लेन हाईजैक के बदले यात्रियों की जान बचाने के लिए भारत सरकार ने तीन आतंकियों मसूद अजहर, उमर शेख और अहमद जरगर को छोड़ा था. इस घटना के इक्कीस साल बाद वो तीन आतंकी कहां हैं.

दरअसल, भारत के कब्जे से छूटने के बाद मसूद अजहर ने पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया और इसका सरगना बन गया. मसूद अजहर ने उसके बाद भारत पर सबसे ज्यादा आतंकी हमलों को अंजाम दिया जिसमें भारतीय संसद पर हमला, मुंबई हमला, पठानकोट एयरबेस हमला और पुलवामा हमला शामिल है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित वैश्विक आतंकवादी मसूद अजहर को पुलवामा आतंकी हमले के मामले में फरार घोषित किया गया है.

उमर शेख ने 2002 में वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल की भी हत्या कर दी थी. इस मामले में उसे और उसके साथियों को फांसी की सजा भी सुनाई गई थी लेकिन पाकिस्तान की सिंध हाईकोर्ट ने इसी साल सभी को बरी कर दिया था. हालांकि इनको बरी किए जाने के खिलाफ पर्ल के परिवार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है, जिस पर सुनवाई चल रही है.

मुश्ताक अहमद जरगर ने छोड़े जाने के बाद कश्मीर में कई ग्रेनेड हमले करवाए हैं. पिछले साल फरवरी में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए आतंकी हमलों के पीछे उसका भी हाथ था. मुश्ताक मूल रूप से कश्मीर का ही रहने वाला है. मसूद अजहर का करीबी माना जाने वाले मुश्ताक पर दर्जनों लोगों के कत्ल का इल्जाम है. 

क्या थी प्लेन हाईजैक की घटना 
इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 ने काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरी थी. जैसे ही विमान शाम के साढ़े 5 बजे भारतीय हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, तभी बंदूकधारी आतंकियों ने विमान का अपहरण कर लिया. और वे विमान को अमृतसर, लाहौर और दुबई होते हुए कंधार, अफगानिस्तान ले गए. 

कंधार जाने से पहले जब विमान को संयुक्त अरब अमीरात यानी दुबई में उतारा गया था, तब अपहरणकर्ताओं ने 176 यात्रियों में से 27 को दुबई में छोड़ दिया था. विमान हाईजैक करने वाले आतंकियों ने खौफ पैदा करने के लिए हाईजैकिंग के कुछ ही घंटों में एक यात्री रूपन कात्याल को मार दिया था. 25 साल के रूपन कात्याल की हाल ही में शादी हुई थी और वह अपनी पत्नी के साथ हनीमून पर गए थे. 

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अपहरणकर्ताओं ने शुरू में भारत सरकार से भारतीय जेलों में बंद 35 उग्रवादियों की रिहाई और 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग की थी. लेकिन कई दिनों तक तक चली बातचीत के बाद 31 दिसंबर को अपहरणकर्ता तीन कैदियों की रिहाई की मांग पर आकर मान गए. सरकार और अपहरणकर्ताओं के बीच समझौते के बाद दक्षिणी अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट पर अगवा रखे गए सभी बंधकों को रिहा कर दिया गया. 

तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के विदेश मंत्री जसवंत सिंह खुद तीनों आतंकियों को अपने साथ कंधार ले गए थे. भारत सरकार और आतंकियों के बीच समझौता होते ही अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने उन्हें 10 घंटे के भीतर अफगानिस्तान छोड़ने का अल्टीमेटम दिया था. शर्तों पर सहमति बनते ही आतंकी हथियारों के साथ विमान से उतरे और एयरपोर्ट पर इंतजार कर रही गाड़ियों में बैठकर तुरंत रवाना हो गए.

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