देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को भरी दुपहरी में लोगों की आंखों के सामने एक वारदात होने वाली थी. लेकिन हो न सकी. क्योंकि उस वारदात को उन चौकन्नी निगाहों ने होने से बचा लिया, जिन पर दिल्ली को नाज है.
दोपहर के करीब 2 बजे सरिता विहार मेट्रो स्टेशन के फुटओवर ब्रिज के दूसरे सिरे की सीढ़ियों पर एक लड़की और एक लड़का पहुंचे. लड़की मटमैले रंग का टॉप और काली जींस पहने हुई थी. जबकि काली शर्ट और सफेद रंग का पैंट पहने लड़का उसके ठीक पीछे कुछ फासले पर था. लड़की ब्रिज पर पहुंचकर सीढ़ियों के नज़दीक कोने में रेलिंग से टिककर खड़ी हो जाती है. जबकि उसके ठीक पीछे आने वाला लड़का वहां रुकता नहीं है बल्कि आगे निकल जाता है.
ब्रिज पर लोगों की आवाजाही कम जरूर है. लेकिन रह रह कर इक्का दुक्का लोग आते जाते हैं. मगर उन सबसे बेखबर लड़की वहीं उसी जगह पर खड़े होकर ब्रिज से नीचे की तरफ देखती है. लड़की के करीब से गुजरने वालों में से एक शख्स जरूर लड़की की तरफ घूमकर देखता है. क्योंकि दोपहर के वक्त धूप में कोई लड़की इस तरह पुल पर क्यों खड़ी है और वो बिना कुछ कहे अपने रास्ते पर आगे बढ़ जाता है.
लोगों की आवाजाही के बीच थोड़ी देर बाद मेट्रो स्टेशन की तरफ से वही काली शर्ट वाला लड़का फिर नज़र आता है. वो धीरे धीरे चलता हुआ सीधा लड़की के पास जाकर रुक जाता है. लोगों की आवाजाही से बेखबर दोनों आपस में बात करने लगते हैं. कुछ देर बात करने के बाद लड़का उसी सीढ़ियों से उतर कर चला जाता है. जिन सीढ़ियों से वो लड़की के पीछे पीछे चलता हुआ ब्रिज पर आया था. लड़के के वहां से जाने के बाद भी लड़की वहीं खड़ी रहती है और काफी देर तक ब्रिज से नीचे की तरफ देखती रहती है.
थोड़ी देर बाद अचानक लड़की हरकत करती दिखाई देती है. वो अपने दोनों पैर रेलिंग पर टिकाती है. जिस वक्त लड़की रेलिंग पर पैर रखकर खड़ी होती है उसके ठीक पीछे से गुजर रहा एक और नौजवान सामने की रेलिंग पर टिककर खड़ा हो जाता है. लड़की चुपचाप सीढ़ियों से चढ़कर आ रहे एक राहगीर को देखती है और खामोश होकर खड़ी हो जाती है.
उस राहगीर के करीब से गुजर जाने के बाद जैसे ही दूसरी तरफ रेलिंग से टिककर खड़ा लड़का अपनी जगह से हटकर सीढ़ियों की तरफ बढ़ता है. तभी लड़की की हरकत सभी को बुरी तरह चौंका देती है. वो रेलिंग के ऊपर पैर चढ़ाकर रेलिंग को पार करने की कोशिश करती दिखाई देती है. जिस वक्त लड़की रेलिंग पार करने की कोशिश कर रही थी ब्रिज से तीन लोग गुज़र रहे थे. दो लड़कियां और एक नौजवान, जबकि सीढ़ियों के नजदीक खड़ा लड़का नीचे की तरफ देख रहा था.
देखते ही देखते लड़की रेलिंग को फांदने की कोशिश करती दिखाई देती है और एक ही झटके में रेलिंग से लटकने लगती है. अब लड़की की पीठ सड़क की तरफ और चेहरा ब्रिज की तरफ हो जाता है. लड़की को इस हालत में देखकर ब्रिज से गुज़र रही दो लड़कियों में से एक उसके करीब जाती है और उससे कुछ बात करती दिखाई देती है.
एक लड़की पुल से कूदने की कोशिश करती दिखाई दे रही है जबकि दो लड़कियां उससे बात कर रही हैं. ये मंजर पुल पर आने जाने वाले लोगों को अपनी ओर खींचता है और एक एक करके कई लोग अचानक वहां इकट्ठा हो जाते हैं. मगर कोई भी उस रेलिंग से लटकी हुई लड़की के करीब जाने की हिम्मत नहीं करता. तभी मेट्रो स्टेशन की तरफ से एक वर्दी वाला भागता हुआ आगे बढ़ता नज़र आता है और उस जवान के पीछे एक और वर्दी वाला उसी तरफ आगे बढता है.
सीआईएसएफ के जवान जवान तेजी से भीड़ के बीच से गुजरकर उस लड़की के करीब पहुंचता है और एक ही झटके में रेलिंग से लटकी हुई लड़की का हाथ पकड़ लेता है. हाथ पकड़ते ही वो जवान उस लड़की के करीब ब्रिज पर गिरा हुआ उस लड़की का ही कोई सामान उठाता है और उस जवान के पीछे आ रहा दूसरा जवान भी अपने साथी का साथ देने उसके करीब पहुंच जाता है. दो वर्दीवालों को एक लड़की को रेलिंग से लटकने की हालत से बचाने की कोशिश करता देख ब्रिज पर अच्छा खासा मजमा लग जाता है.
वर्दी वाला वो जवान रेलिंग से लटकी हुई लड़की को खींचकर ब्रिज के ऊपर लाता है तभी एक महिला सिपाही भी उसी दिशा में बढ़ती दिखाई देने लगती है. वो महिला सिपाही अपने साथियों के करीब पहुंचकर लड़की का हाथ पकड़ती है और उसे मेट्रो स्टेशन की तरफ लेकर चलने लगती है.
अब आप जानना चाहते होंगे कि आखिर ये लड़की कौन है? वो क्यों पुल से कूद कर जान देना चाहती थी. वो लड़का कौन था जो उसे मरने के लिए छोड़ कर चला गया? और सबसे बड़ा सवाल ये कि आखिर सीआईएसएफ के जवानों को कैसे पता चला कि लड़की पुल से कूदने वाली है?
वो लड़की कौन है और कहां की रहने वाली है. उसकी बदनामी न हो इसलिए हम उसकी पहचान का खुलासा नहीं कर सकते. बस यूं समझ लीजिए. वो लड़की राजधानी की ही रहने वाली है और अपने ब्यॉयफ्रेंड के साथ यहां पहुंची थी. लेकिन किसी बात पर दोनों में झगड़ा हुआ और उसी झगड़े के बाद उसका ब्वॉय फ्रेंड वहां से चला गया. शायद उसे भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि लड़की पुल से कूदने की भी कोशिश कर सकती है. वो शायद इसी गुमान में उसे अकेला छोड़कर वहां से चला गया कि उसकी तरह वो लड़की भी कुछ देर बाद वहां से चली जाएगी. लेकिन सीआईएसएफ के जवानों को कैसे पता चला कि ब्रिज पर खड़ी लड़की कूदने वाली है.
दिल्ली के दूसरे तमाम मेट्रो स्टेशन की तरह सरिता विहार मेट्रो स्टेशन की हिफाजत का जिम्मा सीआईएसएफ के जवान करते हैं. मेट्रो स्टेशन और उसके इर्द गिर्द कोई हादसा या वारदात दस्तक न दे सके, इसके लिए स्टेशन के चप्पे चप्पे पर नज़र रखने के लिए बाकायदा सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. और वहीं स्टेशन में बनाए गए कंट्रोल रुम में बाकायदा सीसीटीवी कैमरों की तस्वीरों की मॉनिटरिंग भी सीआईएसएफ के जवान करते रहते हैं.
सीसीटीवी कैमरे की तस्वीरों की मॉनिटरिंग के दौरान सीआईएसएफ के जवानों ने जब फुटओवर ब्रिज पर लड़की को काफी देर तक अकेले खड़े देखा तो उन्हें शक हुआ. लिहाजा उन लोगों ने उसकी हरेक हरकत पर नज़र गड़ा दी. और जैसे ही उन्हें लगा कि लड़की ब्रिज से कूद भी सकती है. तो ऐन वक्त पर सीआईएसएफ का जवान मौके पर जा पहुंचा और वक्त रहते एक जिंदगी के साथ साथ एक हादसा होने से बचा लिया.