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लगातार ऊपर क्यों जा रहा है बेंगलुरु में कोरोना का ग्राफ? क्या बेहतर ​टेस्टिंग बनी वजह?

सितंबर के बाद पांच सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में से चार में दैनिक नए केस का ग्राफ या तो समतल हुआ है या फिर नीचे आया है. लेकिन बेंगलुरु का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है. 26 सितंबर को बेंगलुरु ने दैनिक केस के मामले में दिल्ली को पीछे छोड़ दिया जबकि दिल्ली में संक्रमण की दूसरी लहर शुरू हो गई थी.

बेंगलुरु में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामले (सांकेतिक-पीटीआई) बेंगलुरु में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामले (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में रोज 50,000 से ज्यादा टेस्ट किए जा रहे
  • बेंगलुरु में रोजाना 38,000 टेस्ट, लेकिन केस बढ़ रहे
  • दिल्ली का TPR 9% से नीचे तो बेंगलुरु में 13.5%

पिछले तीन हफ्तों के दौरान भारत में, खासकर इसके सबसे बड़े शहरों में कोरोना को लेकर ज्यादातर अच्छी खबरें आई हैं. लेकिन बेंगलुरु इसका एक गौरतलब अपवाद रहा. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि बेंगलुरु में लगातार बढ़ते केस की संख्या बेहतर ​टेस्टिंग की वजह से है, लेकिन ये बात पूरी तरह से सच नहीं है.

बेंगलुरु में कोरोना का प्रकोप दिल्ली, मुंबई या चेन्नई की तुलना में काफी बाद में शुरू हुआ, लेकिन एक बार शुरू होने के बाद इसमें लगातार उछाल जारी है.

जुलाई के बाद बेंगलुरु की तुलना के लिए पुणे सबसे करीब था, लेकिन एक महीने बाद यहां भी केस में उछाल आया और हर दिन करीब 2,000 केस बढ़ने लगे. हालांकि, पुणे और अन्य शहरों में अब हालात बदल गए हैं, जबकि बेंगलुरु में केसों में वृद्धि अब भी जारी है.

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दिल्ली में अब भी सबसे ज्यादा केस (3.09 लाख) हैं, लेकिन एक्टिव केस (करीब 67,000) सबसे ज्यादा बेंगलुरु में हैं. ये दर्शाता है कि यहां स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव ज्यादा है, जबकि अन्य शहरों में ये आसानी से कम होना शुरू हो गया है. करीब 26,000 ​एक्टिव केस के साथ मुंबई दूसरे स्थान पर है.

हालांकि, कुल केसों की संख्या के लिहाज से देखें तो बेंगलुरु दिल्ली से बहुत पीछे नहीं है. 2.81 लाख केस के साथ ये राजधानी दिल्ली के बाद ठीक दूसरे स्थान पर है और 2.3 लाख केस के साथ मुंबई तीसरे स्थान पर है.  

सितंबर के बाद पांच सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में से चार में दैनिक नए केस का ग्राफ या तो समतल हुआ है या फिर नीचे आया है. लेकिन बेंगलुरु का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है. 26 सितंबर को बेंगलुरु ने दैनिक केस के मामले में दिल्ली को पीछे छोड़ दिया जबकि दिल्ली में संक्रमण की दूसरी लहर शुरू हो गई थी. फिलहाल बेंगलुरु में हर दिन करीब 4,400 केस दर्ज हो रहे हैं. वहीं दिल्ली में 2,600, मुंबई में 2,100, चेन्नई में 1,300 और पुणे में 700 केस दर्ज हो रहे हैं.

हम ज्यादा टेस्ट करा रहेः प्रभारी मुनीश मौदगिल 
कर्नाटक के कोरोना वार रूम प्रभारी मुनीश मौदगिल के अनुसार, ऐसा इसलिए है क्योंकि बेंगलुरु अन्य शहरों की तुलना में ज्यादा टेस्ट कर रहा है. आईएएस अधिकारी मौदगिल ने कहा, “टेस्टिंग में 10 गुना वृद्धि को नजरअंदाज करना और सिर्फ दैनिक केस में वृद्धि को देखना नागरिकों के समक्ष एक गलत समझ और गलत तस्वीर पेश करता है.”

ज्यादातर दिन दिल्ली में 50,000 से ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में ये संख्या सबसे ज्यादा है. इसकी तुलना में बेंगलुरु हर दिन 38,000 टेस्ट ही कर रहा है लेकिन यहां केस ज्यादा आ रहे हैं. चेन्नई, मुंबई और पुणे और भी कम टेस्ट कर रहे हैं. इनमें से चेन्नई सिर्फ RT-PCR टेस्ट करता है, जबकि दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र में एंटीजन टेस्ट भी किए जा रहे हैं.

 
मौदगिल ने कहा, “संक्रमण के प्रसार को ट्रैक करने का बेहतर तरीका टेस्ट पॉजिटिविटी रेट और केस मृत्यु दर है, न कि कुल केस की संख्या.” लेकिन टेस्ट पॉजिटिविटी रेट (टीपीआर) तो हर जगह नीचे आ रहा है, दिल्ली में टीपीआर बेंगलुरु से कम है. इसके अलावा एंटीजन टेस्ट का मुद्दा भी बना हुआ है.

बेंगलुरु में TPR 13.5 फीसदी 
इस महीने की शुरुआत से दिल्ली का टीपीआर 9 फीसदी से नीचे बना हुआ है, जबकि बेंगलुरु में टीपीआर 13.5 फीसदी है. टीपीआर कुल टेस्ट में से पॉजिटिव पाए गए केस का अनुपात है. मुंबई और पुणे में हर दिन कम टेस्ट हो रहे हैं और इनका टीपीआर क्रमश: 18 फीसदी और 23 फीसदी है जो कि काफी ज्यादा है.

तमिलनाडु चिकित्सा सेवा निगम के प्रबंध निदेशक और डॉक्टर पी उमानाथ का कहना है, “तमिलनाडु में हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण इंडीकेटर आरटी-पीसीआर टेस्ट की पॉजिटिविटी है, क्योंकि सिर्फ यही एक तरीका है जिससे सही तस्वीर सामने आती है.” कर्नाटक इस इंडीकेटर के बारे में अलग से कोई जानकारी नहीं देता.

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