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Exclusive: लॉकडाउन में सर्विलांस से कोरोना वायरस पर होगा नियंत्रण

आंकड़े कहते हैं कि दुनिया के और देशों की तुलना में भारत काफी कम जांच दर वाले देशों में से एक है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और डाटा वेबसाइट “Our World in Data” के अनुसार, भारत प्रति एक हजार लोगों पर 0.2 टेस्ट कर रहा है.

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कोरोना टेस्टिंग के लिए LNJP अस्पताल पहुंचे लोग (फोटो- पीटीआई)
कोरोना टेस्टिंग के लिए LNJP अस्पताल पहुंचे लोग (फोटो- पीटीआई)

  • भारत में सिर्फ टेस्टिंग के भरोसे नियंत्रण नहीं
  • संक्रमण रोकने के लिए सर्विलांस का सहारा

भारत में Covid-19 परीक्षण मुख्य रूप से सर्विलांस के जरिये किया जा रहा है. बुधवार, 15 अप्रैल तक भारत में करीब 11,000 कन्फर्म मामले सामने आए हैं. इसके लिए प्रयोगशालाओं में 2.5 लाख लोगों के ​टेस्ट किए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इनमें से ज्यादातर को सर्विलांस नेटवर्क के जरिये चिन्हित किया गया.

मंत्रालय अधिकारी ने इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) को बताया, “आप कुछ दिनों में मामलों के दोगुना होने की तुलना नहीं कर सकते क्योंकि प्रत्येक देश की अपनी जांच करने की स्पीड और अपनी अलग क्षमता है. हम संक्रमित लोगों का पता लगाने और लॉकडाउन के माध्यम से संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए सर्विलांस का सहारा ले रहे हैं. हम अपनी सीमाओं के कारण व्यापक स्तर पर जांच नहीं कर सकते. लेकिन इस परिस्थिति में हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं.”

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आंकड़े कहते हैं कि दुनिया के और देशों की तुलना में भारत काफी कम जांच दर वाले देशों में से एक है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और डाटा वेबसाइट “Our World in Data” के अनुसार, भारत प्रति एक हजार लोगों पर 0.2 टेस्ट कर रहा है. इसलिए, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में 134 करोड़ लोगों के लिए जांच की यह संख्या जमीनी सच्चाई को सामने नहीं ला सकती.

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न्यूयॉर्क में ट्रूडो इंस्टीट्यूट के वायरल डिजीज रिसर्च एंड ट्रांसलेशनल साइंस की प्रमुख जांचकर्ता डॉ प्रिया लूथरा ने कहा, “पहली बात तो भारत में कुल परीक्षणों की संख्या बहुत कम है, और इसलिए हम कुल मामलों की वास्तविक संख्या से बहुत दूर हैं. हमने अन्य देशों के आंकड़ों में देखा है कि आबादी के एक बड़े हिस्से में संक्रमण के लक्षण नहीं दिखते या फिर तमाम लोगों को हल्का संक्रमण है. 'ब्रिटिश जर्नल मेडिसिन' में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि Covid-19 के 78 प्रतिशत मरीजों में कोई लक्षण नहीं दिखते. इसलिए यह कन्फर्म किए गए मामलों की कुल संख्या पर बहुत ज्यादा असर डालता है.”

इस तरह टेस्ट एकमात्र उपकरण है जो यह सामने ला सकता है कि कितने लोगों को वास्तव में संक्रमण है, कितने में हल्के लक्षण हैं, कितने लोगों में संक्रमण है लेकिन कोई लक्षण नहीं है, और यह वायरस कितनी तेजी से फैल रहा है. ICMR के मुताबिक, भारत ने बुधवार तक हर दस लाख की आबादी पर लगभग 203 लोगों का टेस्ट किया किया है.

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डॉ लूथरा ने कहा, “अंतत: हमें व्यापक सेरोलॉजी टेस्टिंग (एंटीबॉडी टेस्ट) की जरूरत है जो संक्रमण की कुल संख्या का एक बेहतर अनुमान देने में सक्षम होगी.”

स्वास्थ्य अधिकारी मौजूदा सर्विलांस नेटवर्क के जरिये पूरे भारत में कन्फर्म हुए मामलों के संपर्कों का पता लगा रहे हैं. अब तक 31,000 से अधिक ऐसे संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जो कन्फर्म हुए मामलों के संपर्क में थे. अधिकारियों ने सिर्फ सर्विलांस के जरिये कोरोना के 5000 से ज्यादा कन्फर्म मामलों का पता लगाया है.

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भारत 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 लाख से अधिक लोगों की निगरानी कर रहा है. अलर्ट के आधार पर लगभग 23,000 लोग अस्पतालों में भर्ती किए जा चुके हैं. सूत्रों ने कहा कि हेल्थ वर्कर्स के मजबूत नेटवर्क इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के जरिये गुरुवार तक 79,000 लोगों के सैंपल लिए गए हैं, जिसमें से 8,000 से ज्यादा लोग पॉजिटिव पाए गए हैं.

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दक्षिण कोरिया के उलट, भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर सर्विलांस की रणनीति अपनाई है और सिर्फ उन्हीं लोगों का टेस्ट कर रहे हैं जो किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं और जिनमें Covid-19 के संक्रमण की आशंका हो सकती है. परीक्षण किट की कमी के बीच भारतीय अधिकारी लॉकडाउन के साथ साथ सर्विलांस के जरिये कोरोना से जंग जीतने के लिए सं​घर्ष कर रहे हैं.

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