दिल्ली हाई कोर्ट में केजरीवाल सरकार पर गलत कोरोना टेस्टिंग पॉलिसी लागू करने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई. दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार, आईसीएमआर को नोटिस जारी किया है. दोनों को एक हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करना होगा. मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी.
याचिकाकर्ता रेनू गोस्वामी ने हाई कोर्ट को बताया कि 2.6.2020 को जारी नोटिफिकेशन गलत है, जिसमें सरकार ने फैसला लिया है कि केवल सिम्पटम वाले लोगों या मरीजो का कोरोना टेस्ट होगा, जबकि आईसीएमआर और डब्लूएचओ की गाइडलाइन में कहा गया है कि सभी मरीज के प्राइमरी कॉन्टैक्ट का कोरोना टेस्ट होना चाहिए.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से ये भी कहा कि राज्य सरकार के इस फैसले से संक्रमण राजधानी में बढ़ेगा. दिल्ली हाईकोर्ट में कोविड-19 टेस्टिंग पॉलिसी को लेकर आज दो याचिकाएं लगी हुई थी. इसमें से एक 77 साल की एक महिला की तरफ से लगाई गई थी, जबकि दूसरी डॉक्टर के के अग्रवाल की तरफ से लगाई गई थी.
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कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान डॉक्टर केके अग्रवाल ने ने कहा कि डॉक्टर के पास किसी भी मरीज के कोरोना टेस्ट को कराने का अधिकार होना चाहिए. बिना लक्षणों वाले कोरोना मरीज की मौत हो सकती है, इसीलिए कोरोना टेस्ट कराने का अधिकार हर व्यक्ति के पास होना चाहिए. दिल्ली सरकार ने दोनों याचिकाओं को खारिज करने की मांग की.
याचिका में मरीजों से पीपीई किट का अधिक दाम वसूलने पर भी रोक लगाने की मांग की गई है. इसके साथ याचिका में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति की सर्जरी की जानी हो तो ये जरूरी है कि उसका कोरोना टेस्ट भी जाए. दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है और उससे जवाब तलब किया है.
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गौरतलब है कि सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर सभी बिना लक्षण वाले लोग टेस्ट कराने पहुंच जाएं तो सिस्टम ठप हो जाएगा. बिना लक्षण वाले लोग टेस्ट न कराएं, टेस्टिंग की कोई प्रॉब्लम नहीं है, अगर कोई दिक्कत आती है तो उसे ठीक कर दूंगा.