भारत में निजी क्षेत्र के कारोबार और उद्योग जगत द्वारा किए जाने वाले परोपकार कार्यों में वित्त वर्ष 2019-20 में 23 फीसदी की बढ़त हुई है. इस दौरान उन्होंने परोपकारी कार्यों के लिए 64,000 करोड़ रुपये दान किए हैं.
निजी क्षेत्र के दान में यह बढ़त अमीर परिवारों द्वारा किए गए दान में करीब तीन गुना बढ़ोतरी की वजह से भी है. वित्त वर्ष 2019-20 देश के अमीर परिवारों ने 12,000 करोड़ रुपये का दान किया है.
रिपोर्ट में क्या है
Bain एंड कंपनी और Dasra द्वारा तैयार इंडिया फिलैंथ्रॉपी रिपोर्ट 2021 में यह जानकारी दी गई है. इस रिपोर्ट से यह पता चलता है कि भारत में निजी क्षेत्र के द्वारा परोपकार कार्य बढ़ता जा रहा है. इसमें निजी क्षेत्र की तरह की सभी दूसरी तरह की फंडिंग-विदेशी, कॉरपोरेट और छोटे दानदाताओं की फंडिंग लगभग स्थिर है, लेकिन हाई नेटवर्थ वाले व्यक्तियों (HNIs) या परिवारों के द्वारा दिए जाने वाले फंड में बढ़ोतरी हो रही है.
किसका, कितना हिस्सा
निजी क्षेत्र द्वारा किए जाने वाले दान में करीब एक चौथाई विदेशी दानदाताओं का, करीब 28 फीसदी देसी कंपनियों के द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (CSR) के रूप में और छोटे निवेशकों का हिस्सा करीब 28 फीसदी है. इसके बाद बाकी बचा करीब 20 फीसदी हिस्सा अमीर परिवारों द्वारा किए जाने दान का है.
गौरतलब है कि भारत के कॉरपोरेट जगत में परोपकार कार्यों का नेतृत्व विप्रो के संस्थापक चेयरमैन अजीम प्रेमजी कर रहे हैं. पिछले साल जारी एडलगिव हुरुन इंडिया की परोपकारियों की सूची 2020 में अजीम प्रेमजी और उनके परिवार ने 7,904 करोड़ रुपए के योगदान के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया था. इस सूची में एचसीएल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक अध्यक्ष शिव नादर और उनका परिवार दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के अध्यक्ष और सबसे अमीर भारतीय मुकेश अंबानी परोपकारी लोगों की इस सूची में तीसरे स्थान पर थे.