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YES बैंक को आखिर क्या हुआ, एक दिन में ही 30 फीसदी लुढ़क गए शेयर

बीते चार कारोबारी दिन से येस बैंक के शेयर में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन गुरुवार को बैंक के शेयर 30 फीसदी तक लुढ़क गए.

बैंक के प्रमोटर मधु कपूर ने लिया बड़ा फैसला बैंक के प्रमोटर मधु कपूर ने लिया बड़ा फैसला

  • मधु कपूर के पास बैंक के 17.6 करोड़ शेयर थे
  • शेयरों की बिक्री से 161 करोड़ की कमाई हुई

बीते चार कारोबारी दिन से येस बैंक के शेयर में आई रिकॉर्ड तेजी पर गुरुवार को ब्रेक लग गया. सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन येस बैंक के शेयर 30 फीसदी तक लुढ़ककर 45 रुपये के भाव पर आ गए. ऐसे में सवाल है कि जो शेयर एक दिन पहले तक 60 रुपये के भाव के करीब थे, उसमें अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई. आइए समझते हैं पूरे मामले को.

दरअसल, येस बैंक ने बताया है कि उसकी सबसे बड़ी प्रमोटर मधु कपूर ने 2.5 करोड़ शेयर बेचे हैं. मधु कपूर ने इन शेयरों की बिक्री 65 रुपये के भाव की, जिससे उन्हें कुल 161 करोड़ रुपये की कमाई हुई. हालांकि RBI ने अभी प्राइवेट निवेशकों के लिए 75 फीसदी शेयर ब्लॉक कर दिए है. लिहाजा मधु कपूर सिर्फ 25 फीसदी शेयर ही बेच पाई हैं.

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बता दें कि 2.5 करोड़ शेयरों की बिक्री से पहले मधु कपूर के पास बैंक के 17.6 करोड़ शेयर थे. इस खबर की वजह से भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को येस बैंक का शेयर भाव 50 रुपये के नीचे आ गया. कारोबार के अंत में येस बैंक के शेयर 11.35 फीसदी लुढ़क कर 53.90 रुपये के भाव पर बंद हुआ

कौन है मधू कपूर ?

मधू कपूर, येस बैंक के को-फाउंडर अशोक कपूर की पत्नी हैं. मुंबई के 26/11 आतंकी हमले में अशोक कपूर की मौत हो गई. अशोक कपूर की मौत के बाद उनकी पत्नी मधु कपूर और राणा कपूर के बीच विवाद शुरू हो गया. राणा कपूर येस बैंक के फाउंडर हैं. फिलहाल, राणा कपूर जांच एजेंजी ईडी के शिकंजे में हैं.

बैंक ने ग्राहकों को दी राहत

येस बैंक ने बुधवार को ग्राहकों की 13 दिन से जारी मुश्किलें समाप्त कर दी. अब ग्राहक पहले की तरह पैसे की निकासी कर सकते हैं. इसके साथ ही बैंक ने बताया है कि तीन दिन के लिये बैंक में कार्य का समय भी बढ़ाएगा. बता दें कि रिजर्व बैंक ने पांच मार्च को बैंक पर पाबंदी लगा दी थी.

इसमें ग्राहकों को तीन अप्रैल तक अपने खाते से 50,000 रुपये तक निकालने की सीमा शामिल थी. साथ ही आरबीआई ने बैंक के निदेशक मंडल को हटा दिया था. यस बैंक पुनर्गठन के तहत भारतीय स्टेट बैंक और सात वित्तीय संस्थानों ने करीब 10,000 करोड़ रुपये लगाया है. इसमें निजी क्षेत्र के संस्थान भी शामिल हैं.

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