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TCS और INFOSYS करती हैं H-1B VISA लाटरी में धांधली: US

अमेरिका ने शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों टीसीएस और इंफोसिस पर लॉटरी प्रणाली में ज्यादा टिकट डाल कर एच 1 बी वीजा का एक बड़ा हिस्सा हथियाने का आरोप लगाया है. अमेरिका का ट्रंप प्रशासन वीजा नियमों को और सख्त बनाने में लगा है. ट्

अब अमेरिका का आरोप, वीजा लाटरी में भारतीय कंपनियां करती हैं धांधली अब अमेरिका का आरोप, वीजा लाटरी में भारतीय कंपनियां करती हैं धांधली

अमेरिका ने शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों टीसीएस और इंफोसिस पर लॉटरी प्रणाली में ज्यादा टिकट डाल कर एच 1 बी वीजा का एक बड़ा हिस्सा हथियाने का आरोप लगाया है. अमेरिका का ट्रंप प्रशासन वीजा नियमों को और सख्त बनाने में लगा है. ट्रंप सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियां लाटरी में ढेर सारे टिकट लगा देती हैं जिससे इस लॉटरी ड्रा में उनकी सफलता की गुंजाइश बढ़ जाती है.

व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर डाली गयी बातचीत के अनुसार वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, संभवत: आप उनके नाम जान ही रहे होंगे. टाटा, इंफोसिस और कोग्निजेंट जैसी कंपनियां को सबसे ज्यादा एच 1 बी वीजा मिलता है. वे बहुत ज्यादा संख्या में वीजा के लिए अर्जी लगाती हैं. इसके लिए जितने वीजा मिलेंगे वे लॉटरी में ज्यादा टिकट डालकर बड़ी संख्या में वीजा हासिल कर लेती हैं.

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जब यह सवाल किया गया कि खाली भारतीय कंपनियों का ही उल्लेख क्यों किया जा रहा है तो व्हाइट हाउस का जवाब था कि सबसे ज्यादा वीजा जिन तीन कंपनियों को मिला है उनमें टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज, इंफोसिस और कोग्निजेंट शामिल हैं. अमेरिकी अधिकारी ने कहा, इन तीनों कंपनियों में एच 1 बी वीजा वालों के लिए औसत तनख्वाह 60,000 से 65000 डालर (प्रतिवर्ष) है. इसके विपरीत सिलिकन वैली में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की औसत तनख्वाह करीब 150,000 डालर है. तीनों भारतीय कपंनियों ने अमेरिका प्रशासन के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

भारत का पलटवार
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को कहा अपने सॉफ्टवेयर कौशल के बल पर दुनिया में परचम लहरा रहीं भारतीय आईटी कंपनियां दुनिया में कहीं भी नौकरियां चुराती नहीं बल्कि नौकरियां पैदा करती हैं. देश के अग्रणी आईटी शख्सियतों के साथ एक बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा, "भारतीय आईटी कंपनियां नौकरियां चुराती नहीं, बल्कि नौकरियां पैदा करती हैं. चाहे वह अमेरिका हो या कोई और देश. हमें अमेरिका और शेष दुनिया को दिए उनके योगदान पर गर्व है."

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में एच1बी वीजा नियमों में किए गए संशोधन पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों की चिंताओं से अमेरिकी प्रशासन को अवगत करा दिया गया है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों ने पिछले पांच वर्षो के दौरान अमेरिका को 22 अरब डॉलर टैक्स चुकाया और चार लाख नौकरियां पैदा कीं.

 

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