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2G: CBI की दलीलों की उड़ीं धज्जियां, पढ़ें फैसले की 10 बड़ी बातें

स्पेशल ट्रायल कोर्ट की इन टिप्पणियों से इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं. ये हैं इस मामले की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ओ पी सैनी की 10 अहम टिप्पणियां.

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ए राजा हुए बरी
ए राजा हुए बरी

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में ए राजा और कनिमोझी को बरी किए जाने के अपने फैसले में सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां की हैं. स्पेशल ट्रायल कोर्ट की इन टिप्पणियों से इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं. ये हैं इस मामले की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ओ पी सैनी की 10 अहम टिप्पणियां:-

1. जैसे-जैसे कोर्ट में मामला आगे बढ़ता रहा अभियोग पक्ष बेहद सजग रहा और अपनी बहस में सतर्कता के साथ दलीलें रखता पाया गया.

2. पूरी सुनवाई के दौरान यह समझना बेहद मुश्किल था कि अभियोजन पक्ष अपनी दलीलों से कोर्ट में क्या साबित करना चाह रहा था.

3. अभियोजन पक्ष बेहद कमजोर दलील पेश कर रहा था और मामले में सुनवाई पूरी होते तक कोर्ट को यह साफ हो गया कि अभियोजन पक्ष पूरी तरह दिशाहीन हो गया था.

4. मामले में नियुक्त स्पेशल सरकारी वकील और सामान्य सरकारी वकील बिना किसी तालमेल के अलग-अलग दिशा में दलील देते पाए गए.

इसे भी पढ़ें: कोर्ट में साबित नहीं हुआ घोटाला, जानिए क्या था 2G स्पेक्ट्रम आवंटन का पूरा मामला

5. टेलीकॉम मंत्रालय द्वारा पेश ज्यादातर दस्तावेज असंगठित थे और मंत्रालय के नीतिगत मुद्दे पूरे मामले को और पेंचीदा कर रहे थे जिसके चलते किसी को पूरा मामला समझ में नहीं आया.

6. मंत्रालय के अव्यवस्थित दस्तावेजों और नीतियों से संदेह पैदा होता है कि किसी ने मामले को घोटाले का स्वरूप देने के लिए कुछ अहम तथ्यों को खास तरह पेश किया और कई तथ्यों को ऐसे स्तर तक खींचा गया कि मामले को समझ पाना नामुमकिन हो गया.

7. ए राजा पर लगे आरोपों को साबित करने के लिए सीबीआई की तरफ से कोई सुबूत नहीं रखा गया. न ही कलाईगनार टीवी को 200 करोड़ रुपये के ट्रांसफर को गलत साबित किया जा सका.

8. सीबीआई द्वारा पेश चार्जशीट का आधार गलत ढंग से दस्तावेजों को पढ़ने और कुछ दस्तावेजों को न पढ़ने का नतीजा है. वहीं सीबीआई ने मामले को जांच के दौरान सामने आए गवाहों के मौखिक बयान पर आधारित किया जबकि कोर्ट में सभी गवाह मौखिक गवाही से पलट गए.

9. सीबीआई की चार्जशीट में कई गलत तथ्यों को पेश किया गया, जिसमें वित्त सचिव द्वारा आवंटन के लिए टेलिकॉम कंपनियों की एंट्री फीस में संशोधन की सिफारिश करना भी शामिल है.

10 पूरी सुनवाई के दौरान सीबीआई समेत अभियोग पक्ष पूरी तरह से विफल रहा है. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट के जरिए पेश किए किसी भी आरोप को साबित करने में महज विफलता पाई है.

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