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नोटबंदी से धराशायी रुपया, महंगाई डायन को गया न्योता

मुद्रा बाजार में अब 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 68 से 70 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है. अब मनी एक्सचेंजर से आम आदमी को एक डॉलर खरीदने के लिए 72 से 74 रुपये अदा करने होंगे.

डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ रुपया

गुरुवार को नोटबंदी की मार झेल रही भारतीय मुद्रा को बड़ा धक्का लगा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अबतक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. दिन का कारोबार शुरु होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होने लगा और रुपया उसके मुकाबले 30 पैसे लुढककर 68.86 के स्तर पर पहुंच गया. मुद्रा बाजार के जानकार मान रहे हैं कि अब रुपये को 70 का स्तर पार करने से बचाना मुश्किल हो गया है. आम आदमी को डॉलर और रुपये का ये उतार-चढ़ाव पेंचीदा लग रहा होगा लेकिन वह एक बात साफ-साफ समझ सकते हैं कि रुपये में जारी ये गिरावट उनकी जेब पर बहुत भारी पड़ने जा रही है और नोटबंदी के साथ-साथ मजबूत डॉलर का दोहरा प्रहार उनके लिए सिर्फ महंगाई डायन को न्यौता दे रही है. जानिए कैसे-

1. मुद्रा बाजार में अब 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 68 से 70 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है. अब मनी एक्सचेंजर से आम आदमी को एक डॉलर खरीदने के लिए 72 से 74 रुपये अदा करने होंगे.

2. आपका बच्चा यदि विदेश में पढ़ रहा है तो अब उसकी ट्यूशन फीस अथवा रखरखाव के लिए आपकी जेब से ज्यादा पैसे जाएंगे. मसलन आप 1000 डॉलर प्रति माह भेजते थे तो आप 65,000 रुपये खर्च करते थे. अब आपको लगभग 5000 रुपये अधिक खर्च करना पड़ेगा.

3. आप खुद विदेश यात्रा प्लान करके बैठे हैं तो अब यह यात्रा महंगी हो चुकी है. हवाई जहाज का टिकट खरीदने के साथ-साथ होटल में रहना आपकी यात्रा पर भारी पड़ेगा. वहीं विदेश में खर्च किए एक-एक डॉलर आपके जेब से अधिक रुपये निकालेंगे.

4. देश में शादी-ब्याह और त्यौहार की जरुरत के लिए सोने की बड़ी मांग रहती है. इसे पूरा करने के लिए हमें सोना आयात करना पड़ता है. अब सोने की यह खरीद हमें महंगी पड़ेगी. जिससे देश में ज्वैलरी की कीमत में बड़ा इजाफा होना तय है.

5. सोने के साथ-साथ कच्चे तेल के लिए हम पूरी तरह से आयात पर निर्भर हैं. सरकार के वार्षिक बजट का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चा तेल खरीदने में जाता है. अब महंगा होता डॉलर और सस्ता होता रुपया इस खरीद को महंगा कर देगा और सरकार को अपने खजाने से ज्यादा रुपये खर्च करना पड़ेगा. इसका सीधा असर देश में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर पड़ेगा और इनकी कीमत में इजाफा होना तय है.

6. देश में ट्रांस्पोर्टेशन का प्रमुख जरिए हाईवे है. देश के एक कोने से दूसरे कोने तक रोजमर्रा की जरूरत की चीजें ट्रकों पर लदकर पहुंचती है. इनमें सब्जी, फल, दूध, जैसे जरूरी उत्पाद भी शामिल हैं. अब पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा इन सभी चीजों की कीमतों में इजाफा कर देगा.

7. देश की अर्थव्यवस्था आयात पर निर्भर है. हम ज्यादा चीजों का आयात करते हैं और कम चीजों की निर्यात करते हैं. इससे हमारा (व्यापार नुकसान) ट्रेड डेफिसिट हमेशा निगेटिव रहता है. अब मजबूत डॉलर और कमजोर रुपया हमारे व्यापार नुकसान को बढ़ा देगा. इसकी भरपाई करने के लिए सरकार के पास कर में इजाफा करने का एक मात्र विकल्प रहता है.

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