भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सुस्त विकास दर में जान डालने के लिए मंगलवार को प्रस्तावित मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान प्रमुख दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है. यह अनुमान विशेषज्ञों ने लगाया है. आरबीआई, मंगलवार को मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा की घोषणा करने वाला है.
एंजेल ब्रोकिंग में अर्थशास्त्री, भूपाली ग्रूसेल ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि आरबीआई आगामी नीतिगत समीक्षा में रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है. लेकिन महंगाई के अभी भी उर्ध्वमुखी खतरों और बढ़ रहे चालू खाता घाटा के कारण दर कटौती सीमित ही रहने वाली है.'
इस वर्ष 29 जनवरी को घोषित इसके पहले की समीक्षा में आरबीआई ने सभी प्रमुख नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी.
व्यावसायिक बैंकों द्वारा ली जाने वाली अल्पकालिक उधारी पर ब्याज दर, यानी रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर उसे 7.75 प्रतिशत कर दिया गया था और आरबीआई द्वारा बैंकों से लिए जाने वाले अल्पकालिक ऋण पर ब्याज दर, यानी रिवर्स रेपो दर में भी 25 आधार अंकों की कटौती कर उसे 6.75 प्रतिशत कर दिया गया था.
29 जनवरी को घोषित मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा में आरबीआई ने नकद आरक्षी अनुपात में भी 0.25 प्रतिशत कटौती कर उसे चार प्रतिशत कर दिया था. नकद आरक्षी अनुपात वह राशि होती है, जिसे वाणिज्यिक बैंकों को आरबीआई के पास अपनी जमा के अनुपात में तरल पूंजी के रूप में रखना होता है.
विश्लेषकों ने कहा है कि आरबीआई 19 मार्च की समीक्षा में रेपो और रिवर्स रेपो दर में कम से कम 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है, क्योंकि आर्थिक वृद्धि सुस्त बनी हुई है. विनिर्माण सुधार और मुख्य महंगाई दर से भी आरबीआई को ब्याज दरों में कटौती का कुछ मौका मिल सकता है.
ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य आधारित महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 6.86 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी में यह 6.62 प्रतिशत पर थी. यहीं पर खुदरा महंगाई दर बढ़कर 10.91 प्रतिशत पर पहुंच गई थी.
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, 'विनिर्माण क्षेत्र की महंगाई फरवरी 2013 में घटकर 4.51 प्रतिशत पर आ गई, जबकि जनवरी में यह 4.81 प्रतिशत थी. इससे आरबीआई को ब्याज दरों में कटौती करने और केंद्रीय बजट के निवेश बढ़ाने के इरादे को प्रोत्साहित करने का मौका मिलता है.'