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MODI@3 सालः नीति आयोग से कितना बदल गया इंडिया? 3 गेमचेंजर प्रोजेक्ट

60 महीनों में मोदी सरकार के 36 महीने पूरे होने जा रहे हैं. ऐसे में आंकलन जरूरी है कि भ्रष्टाचार से मुक्ति और तेज विकास के एजेंडा पर जाने के लिए कार्यकाल के इस हिस्से (मोदी के 3 साल) तक कितना बदल गया भारत

मोदी के 3 साल: नीति आयोग से कितना बदल गया इंडिया? मोदी के 3 साल: नीति आयोग से कितना बदल गया इंडिया?

16 मई 2014 को मौजूदा लोकसभा के चुनाव नतीजे आए और पहली बार देश में बीजेपी को इतना बड़ा बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी पीएम बने. मोदी ने कैबिनेट के साथ 26 मई 2014 को पद और गोपनियता की शपथ ली. भ्रष्टाचार से मुक्ति, तेज विकास और बदलाव की अपील के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार ने देश के वोटरों से 60 महीनों का वक्त मांगा था. वादा किया था कि वह कांग्रेस के भ्रष्टाचार युक्त डेवलपमेंट मॉडल से अलग भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए नीतियों में जरूरी बदलाव करेगी.

 

60 महीनों में मोदी सरकार के 36 महीने पूरे होने जा रहे हैं. ऐसे में आंकलन जरूरी है कि भ्रष्टाचार से मुक्ति और तेज विकास के एजेंडे पर जाने के लिए कार्यकाल के इस हिस्से (मोदी के 3 साल) तक कितना बदल गया भारत. गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा बदलाव की इस मुहिम का दारोमदार नीति आयोग को दिया गया जिसे सरकार ने योजना आयोग की जगह लेने के लिए स्थापित किया. इस नीति आयोग को नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांस्फॉर्मिंग इंडिया (NITI) नाम देते हुए केन्द्रीय कैबिनेट ने 1 जनवरी 2015 को स्थापित किया. केन्द्र सरकार के लिए नीतियों का निर्माण करने के लिए नीति आयोग ने 3 अहम उद्देश्यों को सामने रखा- डिजिटल इंडिया, कोऑपरेटिव फेडरलिज्म, महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाना, अर्थात 'नीति आयोग का उद्देश्य है ऐसे सुदृढ़ राज्यों का निर्माण करना जो आपस में एकजुट होकर एक सुदृढ़ भारत का निर्माण करें. राज्यों और केंद्र की ज्ञान प्रणालियां विकसित करना.'

1. डिजिटल इंडिया- इंटरनेट पर डेवलपमेंट का खेल
देश से भ्रष्टाचार का खात्मा करने के लिए केन्द्र सरकार ने डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम उठाया. कालेधन पर लगाम लगाने और देशभर में कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मोदी सरकार ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान करते हुए अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक संचालित 500 और 1000 रुपये की करेंसी को प्रतिबंधित कर दिया. इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए भीम आधार प्लैटफॉर्म लांच किया जिसका मकसद देश में छोटे कारोबारियों को कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहित करना था. इन कोशिशों के चलते केन्द्र सरकार ने अप्रैल 2017 तक 75 शहरों को कम कैश इस्तेमाल के लिए चिन्हित किया. हालांकि नोटबंदी के बाद देश के कुछ हिस्सों में कैश की किल्लत का मामला भी सामने आया और आर्थिक आंकड़ों में भी नोटबंदी का आंशिक असर देखने को मिला. लेकिन देश और दुनिया के ज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने नोटबंदी से लंबी अवधि में फायदा मिलने का दावा किया.

2. कोऑपरेटिव फेडरलिज्म- टीम इंडिया का सपना
केन्द्र सरकार की कोशिश रही कि वह देश में मजबूत राज्यों का निर्माण करे जिससे एक सशक्त भारत बना सकते हैं. इसके लिए केन्द्र सरकार ने पूरे देश को एक कॉमन मार्केट बनाने की दिशा में जीएसटी बिल को पारित कराने में अहम भूमिका निभाई. गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने जीएसटी के मुद्दे पर पूरे देश में आम सहमति बनाने में सफलता पाई और सभी राज्यों की सक्रियता से अंतिम फैसला लिया. अब केन्द्र सरकार की कोशिश जुलाई 2017 से इसे प्रभावी करने की है जिसके लिए GST काउंसिल (सभी राज्यों की अहम भूमिका) को मुख्य किरदार के तौर पर रखा गया है. अब माना जा रहा है कि जीएसटी को सफलता के साथ लागू करने के बाद देश की अर्थव्यवस्था को तेज गति से बढ़ने का मौका मिलेगा. आर्थिक जानकारों का दावा है कि पूरे देश में जीएसटी पूर्ण रूप से प्रभावी होने के बाद देश को डबल डिजिट की विकास दर भी देखने को मिल सकती है.

3. महिलाओं को क्या मिला?
केन्द्र सरकार ने नीति आयोग के निर्देशों पर बीते तीन साल के दौरान कई अहम योजनाओं को शुरू किया जिससे देशभर में महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में अहम कहा जा सकता है. इन योजनाओं में सबसे अहम केन्द्र सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को स्वच्छ और सुरक्षित कुकिंग के लिए उज्जवला स्कीम के तहत एलपीजी मुहैया कराने की थी. वहीं मोदी सरकार ने जनधन स्कीम के तहत महिलाओं को बैंकिंग की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया. साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित किए जाने वाले ज्यादातर मकानों की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम पर करने का मसौदा सामने रखा है.

 

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