कोरोना संकट की वजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए भविष्य निधि (PF) एक बड़ा सहारा साबित हुआ है. यही वजह है कि लॉकडाउन और उसके बाद के दौर में लोगों ने पीएफ से कुल 30,000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं.
मोदी सरकार ने दी थी विशेष सुविधा
गौरतलब है कि कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन की वजह से लाखों लोग बेरोजगार हो गए थे. लाखों लोगों की नौकरी चली गई. ऐसे में लोगों को भारी मुश्किलों से राहत देने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने लोगों को अपने पीएफ का कुछ हिस्सा एडवांस निकालने की सुविधा दी.
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकडाउन के बाद पीएफ की निकासी के लिए एक विशेष कोविंड विंडो का ऐलान किया था. इस सुविधा को परेशान लोगों ने हाथोहाथ लिया. इसके अलावा मेडिकल आदि जरूरतों के लिए पीएफ निकालने की व्यवस्था पहले से थी. कोविड के लिए ईपीएफओ ने पीएफ निकालने की प्रक्रिया को भी काफी आसान रखा था. यह ऑनलाइन था और मंजूर होने तीन-चार दिन के भीतर ही लोगों के खाते में पैसा पहुंच जाता था.
80 लाख लोगों ने निकाला पैसा
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से जुलाई तक 80 लाख सब्सक्राइबर्स ने EPFO से 30 हजार करोड़ रुपये का फंड निकाला है. ईपीएफओ करीब 10 लाख करोड़ का फंड मैनेज करता है और इसके सब्सक्राइबर्स की संख्या करीब 6 करोड़ है. ईपीएफओ को लगता है कि ऐसी ही मुश्किल आगे जारी रही तो करीब 1 करोड़ लोग पीएफ से आंशिक निकासी कर सकते हैं.
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ईपीएफओ अधिकारियों ने बताया कि यह आंकड़ा अप्रैल और जुलाई के तीसरे हफ्ते के बीच का है. सामान्य हालात में इतने कम समय में इतना बड़ा फंड नहीं निकाला जाता है. लेकिन ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि लाखों लोगों की नौकरी चली गई और कुछ लोगों की सैलरी में कटौती हुई है. ऐसे लोगों के पास अपने खर्च चलाने के लिए तो पैसे नहीं ही थे, उनके ऊपर मेडिकल खर्च का भी बोझ आ गया.
सबसे बड़ी निकासी मेडिकल मद में
रिपोर्ट के मुताबिक 30 लाख सब्सक्राइबर्स ने कोविड विंडो के तहत 8000 करोड़ रुपये की निकासी की है. 50 लाख सब्सक्राइबर्स ने सामान्य जरूरतों के लिए 22000 करोड़ रुपये की निकासी की है, जिसमें मुख्यत: मेडिकल जरूरतें हैं. वित्त वर्ष 2019-20 में कुल 72 हजार करोड़ रुपये निकाले गए थे. इस वित्त वर्ष में केवल चार महीने में 30 हजार करोड़ रुपये निकाले जा चुके हैं.