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GST : टैक्स रेट हुए कम, अब पेट्रोल-डीजल को लेकर होगा फैसला?

जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को खत्म हुई अपनी दो दिवसीय बैठक में 200 से ज्यादा उत्पादों का रेट कम कर दिया है. इन्हें 28 फीसदी टैक्स स्लैब से निकालकर 18 और 12 फीसदी के टैक्स स्लैब में रखा गया है. इतना बड़ा बदलाव करने के बाद अभी भी जीएसटी में बदलाव की गुंजाइश बची है. अगली कुछ बैठकों में जीएसटी परिषद कई अहम फैसले ले सकती है. इसमें पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने समेत अन्य कई मुद्दों पर फैसला आ सकता है.

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वित्त मंत्री अरुण जेटली
वित्त मंत्री अरुण जेटली

जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को खत्म हुई अपनी दो दिवसीय बैठक में 200 से ज्यादा उत्पादों का रेट कम कर दिया है. इन्हें 28 फीसदी टैक्स स्लैब से निकालकर 18 और 12 फीसदी के टैक्स स्लैब में रखा गया है. इतना बड़ा बदलाव करने के बाद अभी भी जीएसटी में बदलाव की गुंजाइश बची है. अगली कुछ बैठकों में जीएसटी परिषद कई अहम फैसले ले सकती है. इसमें पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने समेत अन्य कई मुद्दों पर फैसला आ सकता है.

पेट्रोल-डीजल को लाया जाएगा जीएसटी के तहत?

पिछले कुछ समय से पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. केंद्र सरकार के एक्साइज ड्यूटी घटाने और कुछ राज्य सरकारों की तरफ से वैट घटाने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है. ऐसे में सरकार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर विचार कर सकती है. ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी यह पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने की अपील कर चुके हैं.

सभी राज्य तैयार

पिछले महीने महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगटीवार ने कहा था कि सभी राज्यों ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की अनुमति दे दी है. उनके मुताबिक अब इन उत्पादों को इसके तहत लाने के लिए हमें सही वक्त का इंतजार करना होगा. यह सही वक्त अब जल्द ही आ सकता है. अगर पेट्रोल-डीजल जीएसटी के तहत आ जाता है, तो आपको 1 लीटर पेट्रोल के लिए 43 रुपये के करीब चुकाना पड़ सकता है.

रियल इस्टेट का भी लगेगा नंबर

खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली  भी रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की बात कह चुके है. उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि रियल स्टेट को जल्द ही जीएसटी के तहत लाया जा सकता है. जिससे लोगों को बड़े स्तर पर फायदा मिलेगा. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि जीएसटी की आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों में इस पर फैसला लिया जाना तय है.

नियमों को करेगी और सरल

रियल इस्टेट और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर विचार करने के अलावा जीएसटी परिषद टैक्स स्लैब कम करने पर भी विचार कर सकती है. इसके अलावा वह जीएसटी कानून और नियमों में भी बदलाव करने पर विचार करेगी. दरअसल इस पूरी कवायद का मकसद कारोबारियों की सहूलियत को बढ़ाना है.

घटा सकती है टैक्स स्लैब

जीएसटी परिषद मौजूदा टैक्स स्लैब की संख्या भी कम कर सकती है. मौजूदा समय में जहां 5, 12, 18 और 28 फीसदी टैक्स स्लैब में रखे गए हैं. परिषद इन्हें घटाकर दो से तीन तक ही सीमित कर सकती है.

सीमेंट को करेगी सस्ता

कारोबारियों के लिए कई अहम बदलाव करने के साथ ही जीएसटी परिषद सीमेंट और पेंट को भी 28 फीसदी से  नीचे के टैक्स स्लैब में रखने पर विचार कर सकती है. फिलहाल इन दोनों उत्पादों को 28 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा गया है. घर निर्माण और कई अहम निर्माण के कार्य में इनका इस्तेमाल होता है. ऐसे में परिषद इनका रेट कम करने पर भी विचार करेगी.

कारपेट पर 5 फीसदी जीएसटी ?

उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में कारपेट यूनिट के बड़े स्तर पर बंद होने के चलते जीएसटी परिषद कारपेट पर लगने वाले जीएसटी रेट को घटा सकती है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इसे 12 फीसदी से घटाकर  5 फीसदी किया जा सकता है. बता दें कि जीएसटी से पहले कारपेट तैयार करने वाली यूनिट्स  पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगाया जाता था.

घट गई हैं दरें

बता दें कि शुक्रवार को केंद्र सरकार ने जीएसटी के निर्धारण में अब तक का सबसे बड़े बदलाव करते हुए चुइंग गम से लेकर चॉकलेट, सौंदर्य प्रसाधनों, विग से लेकर हाथ घड़ी तक करीब 200 उत्पादों पर कर की दरें घटा दी हैं. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी परिषद की बैठक के बाद कहा कि आम इस्तेमाल वाली 178 वस्तुओं पर कर दर को मौजूदा के 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है.

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