scorecardresearch
 

1 रुपये के नोट वाली पार्टी कैसे बनी खरबों की पार्टी

बहुजन समाज पार्टी 1984 में कांशीराम के नेतृत्व में बनी थी. कांशीराम ने उत्तर भारत में दलित और पिछड़े वर्ग को एक साथ बटोरने के लिए नारा दिया था 'एक वोट, एक नोट'. मतलब कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों से उलट बहुजन समाज पार्टी महज समर्थकों के एक वोट और एक रुपये के नोट के चंदे पर खड़ी होगी.

32 साल में एक रुपये चंदे वाली पार्टी को खरबों का मिलता है चंदा 32 साल में एक रुपये चंदे वाली पार्टी को खरबों का मिलता है चंदा

बहुजन समाज पार्टी 1984 में कांशीराम के नेतृत्व में बनी थी. कांशीराम ने उत्तर भारत में दलित और पिछड़े वर्ग को एक साथ बटोरने के लिए नारा दिया था 'एक वोट, एक नोट'. मतलब कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों से उलट बहुजन समाज पार्टी महज समर्थकों के एक वोट और एक रुपये के नोट के चंदे पर खड़ी होगी. इस बात को 3 दशक बीच चुके हैं. आज बहुजन समाज पार्टी देश में कांग्रेस और बीजेपी के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है जिसकी प्रतिवर्ष चंदे, संपत्ति और अन्य आय से सर्वाधिक कमाई होती है.

आइए देखें कैसे एक वोट और एक नोट की पार्टी कैसे खरबों का सामराज्य बना चुकी है.

1. देश में नोटबंदी के जरिए कालेधन पर लगाम लगाने की कवायद के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने बहुजन समाज पार्टी के बैंक खाते में 104 करोड़ रुपये जमा किए जाने की बात कही. यह रकम 500 और 1000 रुपये की प्रतिबंधित करेंसी में जमा की गई. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रैटिक रिफॉर्म (एडीआर) संस्था के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी ने 2001 से 2016 तक चुनाव आयोग को पार्टी की कमाई के बारे में ब्यौरा दिया है.

2. इस ब्यौरे के मुताबिक 2001 में पार्टी की कुल संपदा 11 करोड़ रुपये आंकी गई थी वहीं इस साल पार्टी की कुल कमाई 5.9 करोड़ रुपये थी. 2001-02 वित्त वर्ष में बहुजन समाज पार्टी का कुल खर्च 1.66 करोड़ रुपये था.

3. वित्त वर्ष 2002-03 में बहुजन समाज पार्टी की कुल संपदा 11 करोड़ से बढ़कर 39 करोड़ रुपये हो गई. इस साल पार्टी की कमाई चार गुना इजाफे के साथ कुल कमाई 29 करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच गई. वहीं साल का पार्टी का खर्च 1.40 करोड़ रुपये रहा.

4. वित्त वर्ष 2003-04 में पार्टी की कुल संपदा बढ़कर 44 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि एक साल पहले के मुकाबले पार्टी की कमाई आधी रही और उसे सिर्फ 11 करोड़ रुपये अर्जित हुए. वहीं इस दौरान पार्टी ने अपने खर्च का नया कीर्तीमान बनाते हुए 16 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए.

5. वित्त वर्ष 2004-05 और 2005-06 के दौरान 44 करोड़ रुपये से अधिक हो गई. इन दोनों वर्षों के दौरान पार्टी की कुल कमाई (17.20 करोड़ रुपये) लगभग कुल खर्च (18.20) के बराबर रही.

6. वित्त वर्ष 2007-08 बहुजन समाज पार्टी के लिए बेहद खास रहा. इस साल पार्टी ने कमाई के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 71 करोड़ रुपये की कमाई की. इस साल पार्टी का खर्च भी सर्वाधिक 15 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

7. अगले ही साल 2008-09 में पार्टी ने एक बार फिर अपना नया रिकॉर्ड बनाया. 182 करोड़ रुपये की कमाई के साथ इस साल पार्टी की कुल संपदा 286 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गई. वहीं इस साल पार्टी ने सर्वाधिक 104 करोड़ रुपये खर्च किए.

8. बहुजन समाज पार्टी ने 2009-10 के दौरान 329 करोड़ रुपये दिखाई. इस साल पार्टी को 56 करोड़ रुपये की कमाई हुई जिसमें से महज 15 करोड़ रुपये का आसपास खर्च किया गया. वर्ष 2010-11 में एक बार फिर पार्टी को 116 करोड़ रुपये की कमाई हुई जिसमें लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च किया गया.

9. वित्त वर्ष 2012-13 और 2013-14 पार्टी की कमाई के हिसाब से बेहतर रहा. इन दोनों साल में पार्टी को कुल 155 करोड़ रुपये की आमदनी हुई. इन दोनों साल का मिलाकर पार्टी ने कुल लगभग 75 करोड़ रुपये खर्च करते हुए पार्टी की कुल संपदा को 447 करोड़ रुपये के पार पहुंचा दिया.

10. वित्त वर्ष 2014-15 बहुजन समाज पार्टी के लिए बेहद खास रहा. इस साल पार्टी की कुल संपदा 500 करोड़ रुपये के स्तर को पारकर 522 करोड़ रुपये हो गई. 2009-10 के बाद इस साल पार्टी ने सर्वाधिक खर्च करते हुए कुल 112 करोड़ रुपये खर्च किए.

गौरतलब है कि एक रुपये के चंदे के आधार पर खड़ी हुई बहुजन समाज पार्टी ने 2001 से लेकर 2016 तक के सफर में 500 करोड़ रुपये से अधिक की संपदा बटोर ली. इससे भी खास यह है कि प्रति वर्ष चुनाव आयोग को दिए जाने वाले कमाई के हलफनामें में पार्टी ने कभी भी 20,000 रुपये से अधिक के चंदे को प्राप्त करने की बात नहीं मानी है. लिहाजा, पार्टी के मुताबिक इन 16 साल के दौरान पार्टी ने 1 रुपये के चंदे और 20,000 रुपये से कम के चंदे की मदद से देश की एक खरबपति पार्टी बनने का कीर्तिमान स्थापित किया है. अब यह जांच का विषय. प्रवर्तन निदेशालय के आरोप के बाद पार्टी प्रमुख मायावती ने दावा किया है कि नोटबंदी के दौरान पार्टी के बैंक अकाउंट में जमा कराए गए 104 करोड़ रुपये सिर्फ चंदे के जरिए बटोरे गए थे. अब देखना है कि मायावती की यह दलील क्या बहुजन समाज पार्टी को एक रुपया चंदा लेने वाले नारे से अलग करता है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें