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बुलेट ट्रेन के मामले में प्रभु की आवाज धीमी क्यों रही?

गुरुवार को पेश रेल बजट में बुलेट ट्रेन को लेकर उतना जोर नहीं रहा, जितना कि यूपीए के रेल बजटों में दिखाई देता रहा है. बुलेट ट्रेन को हाई स्पीड ट्रेन कहकर पुकारा गया. यदि प्लानिंग बदली है तो क्यों-

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गुरुवार को अपना पहला रेल बजट पेश करते हुए सुरेश प्रभु ने बुलेट ट्रेन का जिक्र किया. मुंबई-अहमदाबाद ट्रैक पर हाईस्पीड ट्रेन चलाने के मामले में. जिसकी अध्ययन रिपोर्ट इस साल के मध्य में आ जाएगी. बाकी के बजट में बुलेट ट्रेन को लेकर उतना जोर नहीं रहा, जितना कि यूपीए के रेल बजटों में दिखाई देता रहा है. वजह क्या है इसकी-

1. घाटे वाली भारतीय रेल में कैश की समस्या हमेशा बनी रहती है. ऐसे में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का समय पर पूरा हो पाना ही मुश्किल है.

2. लागत के हिसाब से एक आंकलन है कि एक बुलेट ट्रेन के खर्च में आठ सौ राजधानी ट्रेन चलाई जा सकती हैं. 9 कोच वाली एक बुलेट ट्रेन पर लागत 60 हजार करोड़ आती है, जबकि 17 कोच वाली राजधानी 75 करोड़ में चल पड़ती है.

3. कम गति की ट्रेनों में ही सुरक्षा का बड़ा अभाव है. खासतौर पर दुर्घटनाओं के मामले में. बुलेट के मामले में तो और ज्यादा एहतियात की जरूरत है. जिसके लिए भारत में फूल-प्रूफ टेक्नोलॉजी अभी नहीं है.

4. यदि बुलेट ट्रेन को मौजूदा ट्रैक पर चलाया गया तो उसके समय पर चलने की गुंजाइश हमेशा कम रहेगी. क्योंकि उसे रूट पर चलने वाली अन्य गाडि़यों का भी ध्यान रखना होगा. जो अकसर लेट होती रहती हैं.

5. दुनिया के बाकी देशों में जहां बुलेट ट्रेन चलती है, वहां इसके लिए अलग से ट्रैक बनाए गए हैं. लेकिन भारत में इस ट्रैक को बनाने का मतलब है हर किमी पर 115 करोड़ रुपए का खर्च.

6. अब भी यह सवाल तो है ही कि लंबी दूरी के लिए जब तेज सफर लोगों को हवाई जहाज से हासिल है तो कोई उसे ट्रेन से क्यों करेगा. कई बार तो हवाई जहाज का किराया ट्रेनों से सस्ता पड़ता है.

7. जब सामान्य ट्रनों के ठीक तरह से संचालन में ही कई गड़बडि़यां नजर आती हैं, तो क्या गारंटी है कि बेहद खर्चीले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को बीच में ही बंद नहीं करना पड़ेगा.

8. चीन में लंबे समय से बुलेट ट्रेन चल रही हैं. लेकिन कई रूट बेहद घाटे में हैं. जिसे बंद किया जा रहा है. भारत में ऐसा नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है.

9. बुलेट ट्रेन की मांग जनता की तरफ से कभी नहीं आई. इसे देश की शान बढ़ाने के लिए बजट का हिस्सा बनाया जाता रहा है. दिल्ली मेट्रो की सफलता उसकी पब्िलक डिमांड के कारण है. बुलेट ट्रेन के मामले में ऐसा अभी नहीं है.

10. अभी काफी समय तक तो चुनौती यही है कि बुनियादी रेल सुविधाओं को ही दुरुस्त किया जाए, जो कि काफी पिछड़ी और खस्ता हालत में हैं.

बुलेट ट्रेन के मामले में भारत और चीन:

ये तुलना इसलिए है कि ये दोनों ही देश लगभग साथ-साथ स्वतंत्र हुए. लेकिन साढ़े तीन सौ से चार सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ाकर चीन ने इस तकनीक पर अपनी बादशाहत कायम कर ली है. भले ही उसपर चोरी की तकनीक से बुलेट ट्रेन नेटवर्क तैयार करने का आरोप हो.

- 18 अप्रैल, 2007 में चीन ने पहली हाई स्पीड ट्रेन यानी बुलेट ट्रेन दौड़ाई, लेकिन उसके बाद से उसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए.
- आज चीन के पास 11 हजार किलोमीटर से ज्यादा का बुलेट ट्रेन नेटवर्क है. तकरीबन 2660 बुलेट ट्रेनें दौड़ रही हैं और ये 100 शहरों को आपस में जोड़ती हैं. इसमें रोजाना 20 लाख लोग सफर करते हैं. 2015 के आखिर तक चीन बुलेट ट्रैक को 18 हजार किलोमीटर तक फैला लेगा.
- चीन ने तिब्बत में दुनिया का सबसे ऊंचा बुलेट रेल नेटवर्क तैयार किया है. उसने तिब्बत की पहाड़ियों में 12 हजार फीट ऊंचाई पर पटरियां बिछाई हैं.
- यही नहीं चीन ने दुनिया की सबसे लंबा बुलेट ट्रेन ट्रैक बिछाने का काम भी किया है. बीजिंग से शेनजेंग तक ये ट्रैक 2400 किलोमीटर लंबा है.  फिलहाल 2400 किलोमीटर का ये ट्रैक हांगकांग की सीमा को छूता है. योजना है कि चीन इसे 2015 तक हांगकांग में ले जाएगा.
- चीन बुलेट ट्रेन पर बेतहाशा पैसा खर्च कर रहा है. एक मोटे अनुमान के मुताबिक वो अब तक नेटवर्क तैयार करने में 500 बिलियन डॉलर यानी 30 लाख करोड़ रुपए लगा चुका है. नेटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए वो 133 बिलियन डॉलर लगाने को तैयार है. उसने नेटवर्क तैयार करने की परियोजनाओं की संख्या 20 से बढ़ाकर 64 कर दी है. 

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