भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने सरकार को चेताया है. आईएमएफ के मुताबिक अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर सुस्ती के दौर में है और सरकार को इसे उबारने के लिए तत्काल नीतिगत उपाय करने की जरूरत है.
आईएमएफ के अधिकारी रानिल सलगादो ने कहा, ‘‘भारत के साथ मुख्य मुद्दा अर्थव्यवस्था में सुस्ती का है. हमारा अब भी मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती संरचनात्मक नहीं, चक्रीय है. इसकी वजह वित्तीय क्षेत्र का संकट है.इसमें सुधार उतना तेज नहीं होगा जितना हमने पहले सोचा था. यह मुख्य मुद्दा है.’’
इस दौरान आईएमएफ ने भारत पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट भी जारी की है. रिपोर्ट में आईएमएफ के निदेशकों ने ठोस वृहद आर्थिक प्रबंधन पर जोर दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत जनादेश वाली नई सरकार के सामने सुधारों को आगे बढ़ाने का एक बेहतर अवसर है. इससे समावेशी और सतत वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा.
घरेलू मांग सिर्फ 1 प्रतिशत बढ़ी
सलगादो ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर 4.5 प्रतिशत पर आ गई है जो इसका छह साल का निचला स्तर है. वृद्धि आंकड़ों से पता चलता है कि तिमाही के दौरान घरेलू मांग सिर्फ 1 प्रतिशत बढ़ी है. सलगादो ने कहा कि इसकी वजह गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के कर्ज में कमी है. इसके अलावा व्यापक रूप से कर्ज को लेकर परिस्थितियां सख्त हुई हैं. साथ ही आमदनी, विशेषरूप से ग्रामीण आय कम रही है.इससे निजी उपभोग प्रभावित हुआ है.
IMF की मुख्य अर्थशास्त्री ने चेताया
हाल ही में आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने जनवरी में भारत की वृद्धि के अपने अनुमान में कमी के संकेत दिए हैं. एक कार्यक्रम में गोपीनाथ ने कहा, ‘हम अपने आंकड़ों को संशोधित करते हुए जनवरी में नए आंकड़े जारी करेंगे. इसमें भारत के मामले में उल्लेखनीय रूप से कमी आ सकती है.’ इसके साथ ही गीता गोपीनाथ ने चेताया कि यही हालात रहे तो राजकोषीय घाटा 3.4 फीसदी के दायरे से आगे निकल सकता है.