साल 2004 की बात है, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक निजी बैंक का नाम अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया. दरअसल, इस निजी बैंक के नाम 'Yes' ने लोगों को आकर्षित किया. यह पहली बार था जब किसी बैंक के नाम में लोगों की दिलचस्पी देखने को मिली. कुछ ही सालों में Yes बैंक एक जाना पहचाना नाम बन गया. लेकिन देश के चर्चित निजी बैंकों में शुमार यस बैंक आज संकट के दौर से गुजर रहा है.
संकट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक साल पहले इस बैंक में जिन निवेशकों ने पैसे लगाए हैं उनके 90 फीसदी से अधिक पैसे डूब चुके हैं. वहीं मार्केट कैपिटल की बात करें तो इसमें 70 हजार करोड़ से ज्यादा की कमी आई है. हालात ये हो गए हैं कि एक साल पहले तक यस बैंक के जो शेयर 400 रुपये से अधिक में बिक रहे थे उसकी कीमत अब सिर्फ 30 रुपये रह गई है. अब स्थिति ये हो गई है कि बैंक में प्रमोटर भी अपनी हिस्सेदारी बेचने लगे हैं..बहरहाल, आइए जानते हैं 16 साल के इस 'किशोर' यस बैंक के अतीत से अब तक के सफर के बारे में....
कब क्या हुआ?
- नवंबर 2003 में एक बैंकर राणा कपूर और उनके रिश्तेदार अशोक कपूर ने मिलकर यस बैंक की शुरुआत की.
- अगस्त 2004 में मुंबई में यस बैंक की पहली ब्रांच खुली.
- जून 2005 में बैंक का इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ आम लोगों के लिए लॉन्च हुआ.
- नवंबर 2005 में यस बैंक के फाउंडर राणा कपूर को एन्टरप्रन्योर ऑफ द ईयर अवार्ड मिला.
- मार्च 2006 में बैंक ने अपना पहला वित्त वर्ष के नतीजों का ऐलान किया. बैंक का प्रॉफिट 55.3 करोड़ रुपये जबकि रिटर्न ऑफ एसेट (ROA) 2 फीसदी रहा.
- अगस्त 2007 में यस इंटरनेशनल बैंकिंग की शुरुआत की.
- 26 नवंबर 2008 को मुंबई आतंकी हमले में बैंक के प्रमोटर अशोक कपूर की मौत.
- दिसंबर 2009 में यस बैंक को 30,000 करोड़ के बैलेंसशीट के साथा सबसे तेज ग्रोथ का अवार्ड मिला.
-जून 2013 में बैंक ने देश के अलग-अलग राज्यों में 500 से अधिक ब्रांचों का विस्तार करने का फैसला लिया.
- मई 2014 में बैंक ने ग्लोबल क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के जरिए 500 मिलियन डॉलर जुटाए.
- मार्च 2015 में यस बैंक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी 50 में लिस्टेड हुआ.
- अप्रैल 2015 में यस बैंक ने पहला अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि कार्यालय अबूधाबी में खोला.
- साल 2017 में बैंक ने क्यूआईपी के जरिए 4906.68 करोड़ रुपये जुटाए. यह किसी निजी क्षेत्र द्वारा जुटाई गई सबसे अधिक रकम है.
- साल 2018 में यस बैंक को सिक्योरिटीज बिजनेस के कस्टोडियन के लिए सेबी से लाइसेंस मिला. इसके अलावा सेबी ने म्युचुअल फंड बिजनेस के लिए भी मंजूरी दी.
- आज बैंक के पास 21 हजार से अधिक कर्मचारी हैं.
ये है कर्मचारियों की संख्या

कोर्ट में भी पहुंची वर्चस्व की लड़ाई
26 नवंबर 2008 को मुंबई आतंकी हमले में यस बैंक के एक अन्य प्रमोटर अशोक कपूर की मौत के बाद वर्चस्व की लड़ाई भी देखने को मिली. दरअसल, अशोक कपूर की मौत के बाद पत्नी मधु कपूर चाहती थीं कि बेटी को बैंक के बोर्ड में शामिल किया जाए. मधु कपूर की इस मांग को खारिज कर दिया गया. इसके बाद मामला बंबई हाईकोर्ट में पहुंच गया. बंबई हाईकोर्ट ने साल 2011 में मधु कपूर की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी शगुन को बैंक के बोर्ड में शामिल करने की अनुमति मांगी थी.
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कौन है राणा कपूर?
एक ज्वेलर्स परिवार से आने वाले यस बैंक के फाउंडर राणा कपूर ने अपने करियर की शुरुआत सिटी बैंक में इंटर्न के तौर पर की थी. वह न्यूयॉर्क में इंटर्नशिप कर रहे थे. इसके बाद नीदरलैंड की फाइनेंशियल फर्म राबोबैंक को भारतीय मार्केट में स्थापित करने में मदद की थी. 1998 में अपने साथी अशोक कपूर और हरकीरत सिंह के साथ राणा ने राबो इंडिया फाइनेंस कंपनी बनाई. यहां बता दें कि राणा कपूर के पिता पायलट थे जबकि उनके दादा की ज्वेलरी की दुकान थी. जबकि राणा कपूर ने अपनी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूरी की है. राणा कपूर को फोर्ब्स ने दुनिया के सबसे अमीर बैंकर्स की सूची में भी शामिल किया है.
क्यों यस बैंक की हुई ये हालत?
दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एनपीए और बैलेंसशीट में गड़बड़ी की आशंका की वजह से यस बैंक पर कार्रवाई की. इस वजह से यस बैंक के चेयरमैन राणा कपूर को पद से हटना पड़ा. वहीं बैंक क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के जरिए उम्मीद के मुताबिक फंड जुटाने में कामयाब नहीं रहा. इस माहौल में दुनिया भर की रेटिंग एजेंसियां बैंक को निगेटिव मार्किंग देने लगी हैं. इसके अलावा यस बैंक के मैनेजमेंट में उठा-पटक का असर भी बैंक की सेहत पर पड़ा है.