हर कारोबारी के लिए आय कर रिटर्न में माल एंव सेवा कर का विवरण देना अब आवश्यक हो गया है. इस मामले में प्रोप्राइटर्स और व्यक्तिगत व्यवसायियों के लिए अनुपालन थोड़ा कम है. हालांकि कंपनियों के लिए यह जरूरी है.
क्लियर टैक्स के फाउंडर और सीईओ अर्चित गुप्ता बताते हैं कि कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में जीएसटी में पंजीकृत और गैर-पंजीकृत संस्थाओं को किए गए भुगतान का विभाजन करने को कहा गया है. जीएसटी के अनुसार जीएसटीआईएन और टर्नओवर/ ग्रॉस रिसीप्ट आईटीआर-4 में फाइल करते समय रिपोर्ट करना अनिवार्य है. ये तब ही आप पर लागू होता है, जब आप जीएसटी में रजिस्टर्ड हों.
वह बताते हैं कि हर कारोबारी को बिक्री / खरीद / व्यय पर भुगतान किए गए सीजीएसटी और एसजीएसटी या आईजीएसटी का विवरण देना होता है. यह डिटेल प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट्स में दिखानी होती है. यह उनके लिए जरूरी है जो आईटीआर-3, आईटीआर-5 और आईटीआर-6 फाइल करते हैं.
इसके अलावा अगर 31 मार्च, 2018, तक आपका इनपुट टैक्स क्रेडिट बनता है, जिसे आप ने अभी तक क्लेम नहीं किया है. इसे आपको 'अनुसूची ओआई' (अन्य जानकारी) में दिखाना होगा.
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के अनुसार कंपनियों को आईटीआर-6 फॉर्म में रिटर्न दाखिल करना होता है. इसमें चैरिटेबल उद्देश्य के लिए संपत्ति से आय अर्जित करने वाले शामिल नहीं होते हैं. इन लोगों को आईटीआर-7 दाखिल करना होगा.
जब आईटीआर-6 दाखिल करते हैं, तो कंपनियों को अपने कुल खर्च का ब्रेक-अप बताना होता है. जब आप इसका ब्यौरा देते हैं, तो इसमें आपको हर खर्च शामिल करना होता है. इसमें उन संस्थाओं से खरीद भी शामिल होगी, जो जीएसटी में रजिस्टर्ड हों चाहे न हों. या फिर उन्हें 44एबी के तहत अपने अकाउंट्स को ऑडिट कराने की आवश्यकता हो या न हो.
आईटीआर-6 की जीएसटी अनुसूची के तहत आने वाले असेसी को निम्नलिखित घोषित करनी चाहिए
- जीएसटी लागू होने के बाद वर्ष के दौरान किए गए खर्च की कुल राशि बतानी होगी.
- जीएसटी के तहत पंजीकृत संस्थाओं से खरीदी करने या उस पर किए गए खर्च की सूचना दी जानी चाहिए.
- जीएसटी के तहत गैर-पंजीकृत संस्थाओं से जुड़े खर्च.