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GST पर जंग, मोदी बोले- गुड एंड सिंपल टैक्स, तो कांग्रेस का जवाब- गुजरात सर्विस टैक्स

वित्‍त मंत्री ने की थी जीएसटी में रियायतों की घोषणा वित्‍त मंत्री ने की थी जीएसटी में रियायतों की घोषणा

शुक्रवार की शाम को जीएसटी कांउसिल की दिन भर चली बैठक के बाद जिन चीजों को सस्ता करने की घोषणा की गई उनमें खाखरा भी था और नमकीन भी. उसमे सूखे आम की खटाई भी थी और धागे भी. उसमें टेक्सटाइल भी था पॉलियेस्टर और नॉयलॉन के धागे भी.

इनमें से ज्यादातर चीजों पर जीएसटी की दर को घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया जो जीएसटी कानून के तहत टैक्स फ्री जरूरी वस्तुओं के बाद टैक्स की सबसे कम दर है. लेकिन विपक्ष अब सरकार की इस दरियादिली को गुजरात चुनाव से जोड़कर देख रहा है. विपक्ष्‍ा इसे गुजरात सर्विस टैक्‍स बता रहा है.

शुक्रवार को ही ज्‍वेलर्स को राहत देने वाला ये फैसला भी किया गया कि दो लाख तक के गहनों की खरीद पर अब पैन कार्ड देना जरूरी नहीं होगा. ये भी फैसला हुआ कि जिन व्यापारियों का सलाना टर्नओवर 1.5 करोड़ से कम है उन्हें अब हर महीने के बजाए तीन महीने में एक बार जीएसटी रिटर्न भरना होगा. जीएसटी को लेकर निर्यातकों की भी कई शिकायतें दूर कर दी गईं. राहत भरे इन तमाम फैसलों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को गुजरात दौरे पर चुनाव प्रचार के लिए चले गए, जहां जल्द ही विधानसभा के चुनाव होने हैं. ये एक महीने के भीतर मोदी की तीसरी गुजरात यात्रा है.

अब ये बात किसी से छिपी नहीं है कि जिन चीजों पर जीएसटी कम करने में सरकार की मेहरबानी हुई है उनमें से कई चीजें ऐसी हैं जिनका गुजरात से सीधा रिश्ता है. खाखरा और नमकीन सबसे ज्याद गुजरात में ही खाया जाता है, कपड़ों के बनाने और निर्यात में गुजरात काफी आगे है और सूरत की डायमंड इंडस्ट्री की धाक सबको मालूम है.

पीएम ने कहा- दिवाली जल्‍द आ गई

शनिवार को गुजरात में पीएम मोदी ने कहा भी कि इस बार दीवाली जल्दी आ गई है, क्योंकि जीएसटी की दरों में राहत से छोटे और मझोले व्यापारियों को काफी फायदा होगा. मोदी ने जीएसटी को गुड ऐंड सिंपल टैक्स का नाम दिया था, लेकिन शुक्रवार के फैसलों के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग इसे गुजरात सर्विस टैक्स नाम दे रहे हैं.

इसमें कोई शक नहीं कि जीएसटी की राहत में गुजरात के चुनाव का ख्याल रखा गया है. सरकार को लगातार ये रिपोर्ट मिल रही थी कि जीएसटी के लागू होने के बाद व्यापारियों को जो दिक्कत हुई है उससे उनके भीतर नाराजगी बढती जा रही है. गुजरात न सिर्फ नरेन्द्र मोदी का अपना राज्य है बल्कि व्यापार के मामले में देश में सबसे अग्रणी राज्यों में से है. इसलिए यहां से चुनाव नतीजों पर सबकी नजर होगी और बीजेपी के लिए गुजरात में सत्ता में बने रहना बेहद जरूरी है.

सरकार पर चौतरफा हमला

गुजरात चुनावों के लिए जीएसटी की राहत को लेकर सरकार पर विपक्ष से लेकर सहयोगी दलों की तरफ से चौतफा हमले हो रहे हैं. केन्द्र सरकार में बीजेपी के सहयोगी दल शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे ने कहा कि जीएसटी की दरों में बदलाव गुजरात चुनावों को देखते हुए किया गया है और ये दीवाली गिफ्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमतों में राहत दिए जाने की जरूरत है और बीजेपी ने ये कदम इसलिए उठाया है क्योंकि उसे लोगों के गुस्से का अंदाजा था.

जीएसटी की दरों में बदलाव को मोदी ने गुजरात में दीवाली का तोहफा बताया तो हिमाचल में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि बिना सोचे जीएसटी लागू करने की वजह से गुजरात में ही 30 लाख लोगों ने नौकरियां गंवाईं हैं. सरकार की आर्थिक नीतियों पर लगातार हमला बोल रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी कहा कि राजनीतिक फायदा लेने के लिए जीएसटी के दरों में बदलाव किया गया.

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