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कोरोना इफेक्ट: अगले छह माह में 4.88 लाख करोड़ का कर्ज लेगी सरकार

कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच अप्रैल से सितंबर के बीच बाजार से 4.88 लाख करोड़ रुपये उठाएगी.

नए वित्त वर्ष का आगाज नए वित्त वर्ष का आगाज

  • इस साल 7.8 लाख करोड़ का उधार लिए जाने का अनुमान
  • अगले छह माह में 4.88 लाख करोड़ का कर्ज लेगी सरकार

कोरोना वायरस के प्रकोप से देश की इकोनॉमी तबाह हो रही है. इस हालात के बीच सरकार अगले छह माह में 4.88 लाख करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी में है. इसकी जानकारी आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती ने दी है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020- 21 के लिए बजट में बाजार से 7.8 लाख करोड़ रुपये का उधार लिए जाने का अनुमान लगाया है. कहने का मतलब ये है कि इस रकम का एक करीब 60 फीसदी हिस्सा शुरुआती 6 महीनों में ही ले लिया जाएगा. वित्त मंत्री ने 2020- 21 का आम बजट पेश करते हुए था कि नए वित्त वर्ष में बाजार से उठाई जाने वाली राशि का एक बड़ा हिस्सा पूंजी व्यय में खर्च होने का अनुमान है. सरकार ने पूंजी खर्च में 21 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान किया है.

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बता दें कि सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिये बाजार से धन जुटाती है. इसके लिए मियादी बांड और ट्रेजरी बिल जारी किए जाते हैं. वर्ष 2020- 21 के बजट में सरकार का राजकोषीय घाटा 7.96 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है जो कि सकल घरेलू उत्पाद का 3.5 प्रतिशत होगा.

इकोनॉमी को होगा बड़ा नुकसान!

कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से देश की इकोनॉमी का बुरा हाल होने की आशंका है. बीते दिनों एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि लॉकडाउन की वजह से इकोनॉमी को 120 अरब डॉलर (करीब नौ लाख करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है. नुकसान भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के चार प्रतिशत के बराबर है.

बता दें कि लॉकडाउन 14 अप्रैल तक का है. इस लॉकडाउन की वजह से प्रोडक्शन, सेल्स, डिमांड सबकुछ ठप पड़ गया है. ऐसे में इकोनॉमी की स्थिति ठीक नहीं नजर आ रही है.

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