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Economic Survey 2020: आ गया रोजगार का आंकड़ा, छह साल में 2.62 करोड़ लोगों को मिली नौकरी

Economic Survey of India: वर्ष 2011-12  से 2017-18  के छह साल के बीच देश में 2.62 करोड़ लोगों को नई नौकरियां मिली हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश इकोनॉमिक सर्वे से यह जानकारी सामने आई है.

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Economic Survey 2020 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन पटल पर रखा  (फाइल फोटो: PTI)
Economic Survey 2020 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन पटल पर रखा (फाइल फोटो: PTI)

  • वित्त मंत्री ने शुक्रवार को संसद में इकोनॉमिक सर्वे पेश किया
  • सर्वे के अनुसार, छह साल में 2.62 करोड़ लोगों को नौकरी मिली है
  • ग्रामीण इलाकों में 2.62 करोड़ लोगों को नई नौकरियां मिली हैं
  • सरकार का जोर संगठित क्षेत्र की नौकरी बढ़ाने पर है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए आर्थ‍िक सर्वेक्षण संसद के पटल पर पेश कर दिया है. इस सर्वे के मुताबिक वर्ष 2011-12  से 2017-18  के छह साल के दौरान 2.62 करोड़ लोगों को नई नौकरी मिली है.

सर्वे के मुताबिक वर्ष 2011-12  से 2017-18  के बीच देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में 2.62 करोड़ लोगों को नौकरियां मिली हैं. यह आंकड़ा संगठित क्षेत्र का है. इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, नवंबर 2019 तक कुल 69.03 लाख लोगों को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रश‍िक्ष‍ित किया गया है. यही नहीं, इन 6 साल के दौरान महिलाओं के रोजगार में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

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संगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने पर फोकस

सर्वे के मुताबिक रोजगार के मामले में सरकार का फोकस इस बात पर रहा है कि नौकरियों की गुणवत्ता में सुधार हो और अर्थव्यवस्था में संगठित क्षेत्र की नौकरियां बढ़े. इसी के तहत रेगुलर वेज या सैलरी वाले कर्मचारियों का हिस्स साल 2010-11 के 18 फीसदी के मुकाबले 2017-18  में बढ़कर 23 फीसदी तक पहुंच गया. इस दौरान कुल मिलाकर 2.62 करोड़ नई नौकरियां दी गईं. इसमें से1.21 करोड़ नौकरियां ग्रामीण क्षेत्र में और 1.39 करोड़ नौकरियां शहरी क्षेत्र में दी गईं.

इसके मुताबिक अगले वित्त वर्ष यानी 2020-21 में देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में ग्रोथ रेट 6 से 6.5 फीसदी के बीच रह सकती है. इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट 5 फीसदी रहेगा. इसके पहले सीएसओ द्वारा जारी एडवांस आंकड़ों में भी जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी रहने का अनुमान जारी किया गया था.

छह महीने में दूसरा सर्वे

सर्वे पेश होने से पहले मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार कृष्णामूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा, 'हमारी टीम ने काफी मेहनत किया है. इस टीम ने छह महीने में दूसरा आर्थ‍िक सर्वेक्षण पेश किया है.' 

गौरतलब कि इसके पहले जुलाई 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 का बजट पेश किया था और इसके पहले भी आर्थ‍िक सर्वेक्षण पेश किया गया था.

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सर्वे से देश के आर्थ‍िक हालात की आध‍िकारिक तस्वीर सामने आती है. हर साल इकोनॉमिक सर्वे बजट से एक दिन पहले पेश होता है. वित्त वर्ष 2020-21 का बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश करेंगी.

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क्यों महत्वपूर्ण है सर्वे

देश में पिछले कई सालों से जारी आर्थ‍िक सुस्ती के दौर में यह सर्वे काफी महत्वपूर्ण है. पिछले एक साल में देश की अर्थव्यवस्था की हालत और खराब रही है, इसलिए सबकी नजरें इस वित्त वर्ष के आध‍िकारिक रिपोर्ट पर थीं. इस सर्वे की रिपोर्ट सरकार के मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार (CEA) के नेतृत्व में एक टीम द्वारा तैयार किया जाता है और वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद इसे जारी किया जाता है.

फिलहाल मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम हैं. यह रिपोर्ट 31 जनवरी को यानी आज संसद के दोनों सदनों में वित्त मंत्री के द्वारा रखी गई संसद का बजट सत्र आज सुबह 11 बजे शुरू हुआ और राष्ट्रपति के अभ‍िभाषण के बाद इकोनॉमिक सर्वे को संसद  पटल पर रखा गया.

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क्या होता है इकोनॉमिक सर्वे में

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आर्थिक सर्वे देश के आर्थिक विकास का सालाना लेखाजोखा होता है. इस सर्वे रिपोर्ट से आधिकारिक तौर पता चलता है कि बीते साल आर्थिक मोर्चे पर देश का क्‍या हाल रहा. इसके अलावा सर्वे से ये भी जानकारी मिलती है कि आने वाले समय के लिए अर्थव्यवस्था में किस तरह की संभावनाएं मौजूद हैं.आसान भाषा में समझें तो वित्त मंत्रालय की इस रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर देखी जा सकती है.

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