पारा चढ़ने के साथ ही राजधानी में कूलर का बाजार गर्मा गया है. व्यापारियों का कहना है पिछले साल की तुलना में इस बार कूलर के दाम करीब 20 फीसद तक चढ़ चुके हैं और बावजूद इसके मांग तेज होने से थोक आर्डर पूरा करने में हफ्ता दस दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है.
राजधानी के प्रमुख कूलर बाजार कमला मार्केट के व्यापारियों का कहना है कि अप्रैल और मई के शुरुआती सप्ताह में बाजार ठंडा था, लेकिन जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, कूलरों की मांग बढ़ती जा रही है. यहां तक कि आसपास के राजधानी के छोटे दुकानदारों को अब थोक बाजार से माल के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.
कमला मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन विजय बुद्धिराजा ने कहा, ‘पिछले 10-15 दिन के दौरान गर्मी बढ़ने के बाद बाजार में धड़ाधड़ आर्डर आ रहे हैं. अब तो स्थिति यह है कि स्टॉक समाप्त हो चुका है. नए आर्डर के लिए अब हम एक सप्ताह से 10 दिन का समय ले रहे हैं.’ कृष्णा नगर के एक व्यापारी बिट्टू ने भी कहा कि कि कूलर में इस्तेमाल होने वाले पंप और मोटर जैसे कलपुर्जों की आपूर्ति पर भी दबाव बढ गया है.
थोक बाजार में कूलर 1,200 से 5,000-6,000 रुपये तक में उपलब्ध हैं. वहीं खुदरा बाजार में इनका दाम 30-40 फीसद तक उंचा है. बुद्धिराजा ने कहा कि 80 प्रतिशत कूलर बाजार मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में फैला है. हालांकि, बाजार में बजाज और सिफ्फनी जैसी ब्रांडेड कंपनियां भी मौजूद हैं, लेकिन लोकल कूलर से इनका दाम 70 से 80 फीसद तक अधिक होता है.
कमला मार्केट में आर्डर देने आए भरतपुर राजस्थान के व्यापारी बनवारी ने बताया कि वह पिछले कई साल से कूलरों का व्यापार कर रहे हैं, लेकिन इस बार जैसी मांग आई है, वह उन्होंने पिछले कई साल से नहीं देखी.