कोरोना वायरस की वजह से सुस्त पड़ी देश की इकोनॉमी को रफ्तार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़े विशेष आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है.
बीते मंगलवार को पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के हाल के निर्णय, रिजर्व बैंक की घोषणाओं को मिलाकर यह पैकेज करीब 20 लाख करोड़ रुपये का होगा. यह देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का लगभग 10 प्रतिशत है. अहम बात है कि ये राहत पैकेज सरकार के व्यय लक्ष्य से सिर्फ 10 लाख करोड़ रुपये कम है. आपको यहां बता दें कि सरकार ने साल 2020-21 के लिए 30 लाख 42,230 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है.
इस रकम में विभिन्न मंत्रालयों और कार्यो के लिए करोड़ों रुपये का आवंटन किया जा चुका है. लेकिन क्या आपको पता है कि सरकार को मिलने वाला हर एक रुपया कहां से आता है और कहां खर्च होता है? आइए जानते हैं रुपये के आने और खर्च होने का पूरा गणित. ये कैलकुलेशन सरकार को मिलने और खर्च होने वाले 1 रुपये के हिसाब से समझते हैं.
कहां से आता है 1 रुपया
सरकार को मिलने वाले प्रत्येक एक रुपये में से 20 पैसे उधारी व अन्य देनदारियों से मिलते हैं. वहीं 18 पैसे कॉरपोरेशन टैक्स से मिलते हैं. सरकार को मिलने वाले रुपये में 17 पैसे आयकर से हासिल होते हैं. इस रुपये में कस्टम टैक्स का हिस्सा 4 पैसे है. केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी इस एक रुपये में 7 पैसे का योगदान देती है. जीएसटी व अन्य टैक्स 18 पैसों का योगदान रुपये में देता है. नॉन टैक्स रेवेन्यू से 10 पैसे हासिल होते हैं और कैपिटल रिसिट से 6 पैसे आते हैं. कैपिटल रिसिट में अधिकतर हिस्सेदारी बाजार से उधारी की होती है.

कहां खर्च होता है 1 रुपया
सरकार का मिलने वाले रुपये की तरह खर्च होने का भी अपना हिसाब है. सरकार के प्रत्येक एक रुपये की आमदनी में 20 पैसे राज्यों को टैक्स में भागीदारी के रूप में दिए जाते हैं. वहीं 18 पैसे ब्याज के भगुतान में खर्च हो जाते हैं. इसके अलावा 13 पैसे केंद्रीय सेक्टर की स्कीमों में खर्च होते हैं.
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वित्त आयोग व अन्य में 10 पैसे चले जाते हैं. इसी तरह, केंद्रीय सरकार द्वारा प्रायोजित स्कीमों के लिए रुपये में से 9 पैसे रखे जाते हैं. प्रत्येक एक रुपये में से 8 पैसे रक्षा से जुड़े व्यय पर खर्च होते हैं. इसके अलावा 6 पैसे सब्सिडी पर खर्च हो जाते हैं. वहीं पेंशन पर 6 पैसे जबकि शेष बचे 10 पैसे सरकार के अन्य खर्चो के लिए होते हैं.