scorecardresearch
 

कोरोना इफेक्ट: इस साल गोल्ड की डिमांड 30% घटेगी! रुपये का ये होगा हाल

कोरोना वायरस का प्रकोप भारत की करंसी रुपया पर पड़ने की आशंका है. इससे आभूषण उद्योग भी प्रभावित हो सकता है.

Advertisement
X
सोने की मांग 700 से 800 टन रहने का अनुमान लगाया गया था
सोने की मांग 700 से 800 टन रहने का अनुमान लगाया गया था

  • 2020 में आभूषणों-सोने की मांग में 30% की गिरावट आ सकती है
  • उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7% योगदान देता है

कोरोना वायरस की वजह से भारत समेत दुनियाभर की इकोनॉमी लड़खड़ा चुकी है. इस वजह से भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है. इस माहौल में देश का रत्न एवं आभूषण उद्योग पूरी तरह ठहर गया है. उद्योग संगठन इंडियन चैंबर आफ कॉमर्स (ICC) का मानना है कि इस संकट के चलते 2020 में आभूषणों और सोने की मांग में 30 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है. बाजार के जानकारों की मानें तो मांग में कमी आने से सोने के भाव भी सस्ता हो सकते हैं. बता दें कि ये उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सात प्रतिशत योगदान देता है.

800 टन डिमांड की थी उम्मीद

Advertisement

इंडियन चैंबर आफ कॉमर्स के मुताबिक आभूषण उद्योग की मांग काफी हद तक शादी-ब्याह के सीजन पर टिकी होती है. कोरोना वायरस की वजह से इस तरह के आयोजन रद्द हो रहे हैं और खरीदारी बंद हो गई है. इसका असर पूरे साल दिख सकता है. बता दें कि 2020 में सोने की मांग 700 से 800 टन रहने का अनुमान लगाया गया था. लेकिन अब इसके 30 प्रतिशत घटकर 690 टन रह जाने का अनुमान है.

रुपये का ये होगा हाल

इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में रुपये का मूल्य 75 रुपये प्रति डॉलर के आसपास रह सकता है. इसके अलावा भारत के लिए कच्चे तेल का औसत खरीद मूल्य 35 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेगा. रिजर्व बैंक ने ताजा रिपोर्ट में बताया कि जनवरी मध्य से रुपया दबाव में आया है.

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें

यह दिखाता है कि उभरते बाजारों की मुद्राओं में कमजोरी का रुख है. जहां तक भारत के लिए कच्चे तेल की खरीद के औसत मूल्य का सवाल है तो यह 2020-21 के दौरान 35 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है.

कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव

आरबीआई ने बताया कि अक्टूबर, 2019 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया. दिसंबर के आखिर और जनवरी, 2020 की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही. अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कोविड-19 महामारी फैलने के बाद मांग घटने की संभावना के बीच मार्च की शुरुआत में यह 51 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.

Advertisement

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

रिपोर्ट के मुताबिक 30 मार्च को कच्चा तेल 23 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल 20 डॉलर प्रति बैरल पर था. रूस के साथ उत्पादन कटौती को लेकर कोई सहमति नहीं बनने के बाद सऊदी अरब ने कच्चे तेल के दाम घटाने और उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया, जिससे नौ मार्च, 2020 को यह 32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.

Advertisement
Advertisement