देश में चीन विरोधी माहौल के बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि चीन से आयातित माल को बंदरगाहों पर रोककर सख्त जांच-पड़ताल की जा रही है. सरकार की तरफ से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश नहीं है, लेकिन ऐसी खबरों से भारतीय निर्यातकों को चीन की तरफ से जवाबी कार्रवाई का डर है.
भारतीय निर्यातकों को डर है कि चीनी बंदरगाहों पर उनके साथ जवाबी कार्रवाई की जा सकती है. गौरतलब है कि न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने यह खबर दी थी कि चीन से आयात होकर आने वाले बहुत से कन्साइनमेंट को भारतीय बंदरगाहों पर रोका जा रहा है और इनकी मंजूरी में देरी की जा रही है. चीनी माल की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल की जा रही है.
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क्या कहते हैं निर्यातक
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाईजेशन (FIEO) के प्रेसिडेंट शरद कुमार सराफ ने वाणिज्य मंत्रालय से अनुरोध किया है कि इस बारे में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए ताकि यह साफ हो जाए कि भारत सरकार जानबूझकर चीनी माल को किसी तरह का निशाना नहीं बना रही है.
सराफ ने कहा कि ऐसी खबरें आ रही हैं कि चेन्नई बंदरगाह और देश के कई अन्य बंदरगाहों पर चीन से आने वाले माल की इस संदेह के आधार पर अतिरिक्त जांच की जा रही है कि इनमें कुछ प्रतिबंधित वस्तुएं हो सकती हैं.
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गौरतलब है कि गत 22 जून को चेन्नई के कस्टम्स ब्रोकर्स एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को एक एडवाइजरी जारी कर बताया था कि चीन से आने वाले माल कन्साइनमेंट की 100 फीसदी जांच की जा रही है, इसलिए इनकी क्लियरेंस में देरी हो रही है.
चीनी आयात पर बैन व्यावहारिक नहीं!
सराफ ने कहा कि चीनी आयात को रोकने का प्रयास नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, 'चीन से आने वाले उत्पादों पर बैन लगाने में हमें अतिरिक्त सचेत रहना होगा. यह व्यावहारिक नहीं है.'
गौरतलब है कि भारत-चीन सीमा पर हाल में हुई हिंसक झड़प में हमारे देश के 20 वीर जवान शहीद हो गए थे, जिसके बाद से देश में चीन विरोधी राष्ट्रवाद चरम पर है. कई संगठनों ने चीनी माल के बहिष्कार की अपील की है. भारत-चीन के बीच व्यापार में पलड़ा चीन के पक्ष में क्षुका हुआ है. साल 2018-19 में भारत में चीन से 70 अरब डॉलर का आयात किया गया था. (www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित)