उत्तराखंड से पलायन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. राज्य में 900 से भी ज्यादा ऐसे गांव हैं, जहां अब एक भी इंसान नहीं रहता. यहां पर सैकड़ों घर खंडहर बन चुके हैं. जहां एक तरफ लोगों का यहां से लगातार पलायन जारी है, वहीं कुछ युवा वापस गांवों की तरफ पहुंच रहे हैं.
ऐसे ही दो युवा हैं. पौड़ी जिले के अभय शर्मा और टिहरी के यश भंडारी. इन दोनों युवाओं ने यहां खंडहर बन चुके घरों की बदौलत कमाई का एक अच्छा जरिया ढूंढा है. इससे ये लोग न सिर्फ यहां रोजगार देने में कामयाब हो रहे हैं, बल्कि अच्छी-खासी कमाई भी कर रहे हैं. इन्होंने अपने इस अभियान को 'पहाड़ी हाउस' नाम दिया है.
क्या है पहाड़ी हाउस:
पहाड़ी हाउस की संकल्पना करने वाले अभय ने Aajtak.in से बातचीत में बताया कि उन्होंने यहां खंडहर हो चुके घरों को नये सिरे से तैयार किया है. इन्हें तैयार कर पर्यटकों के लिए होम स्टे के विकल्प के तौर पर पेश किया है. फिलहाल ये लोग टिहरी गढ़वाल के काणाताल में पहाड़ी हाउस चलाते हैं. इसके अलावा ये लोग अब मसूरी में भी पहाड़ी हाउस तैयार करवा रहे हैं.
आपदा में खो गया सबकुछ:
अभय ने बताया कि वह पहले पौड़ी में रिजॉर्ट और राफ्टिंग का बिजनेस किया करते थे, लेकिन 2013 में आई आपदा ने उनका पूरा कारोबार खत्म कर दिया. इसकी वजह से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और गांव लौटकर कुछ करने की ठानी. आज इनके प्रयास को राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सराहा है.
क्या मिलता है पहाड़ी हाउस में :
अभय के मुताबिक पहाड़ी हाउस उन लोगों के लिए सबसे मुफीद है, जो प्रकृति के नजदीक रहना चाहते हैं. वह बताते हैं कि अगर कोई प्राकृतिक भोजन और प्रदूषण व शहर की भागदौड़ से दूर जाना चाहता है, तो उन्हें यहां सबकुछ मिलेगा.
यहां पर्यटकों के लिए खुद खाना बनाने की भी व्यवस्था है. इसके लिए सब्जी यहां के स्थानीय लोगों से खरीदी जाती है. इस एवज में यहां के लोगों के लिए भी रोजगार का एक साधन हो गया है.