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बिजनेस

AI से पवन हंस तक, इन सरकारी कंपनियों के नहीं मिले खरीदार

AI से पवन हंस तक, इन सरकारी कंपनियों के नहीं मिले खरीदार
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बीते कुछ दिनों से प्राइवेट सेक्‍टर की एयरलाइन जेट एयरवेज की बदहाली की खूब चर्चा हो रही है. कर्ज में डूबी जेट एयरवेज अब नीलामी की प्रक्रिया से गुजरने वाली है. जेट एयरवेज के लिए मुख्‍य तौर पर 4 खरीदार सामने आए हैं. लेकिन कई ऐसी सरकारी कंपनियां हैं जिन्‍हें सरकार बेचना तो चाहती है लेकिन कोई खरीदार नहीं मिल रहा है. सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद जिन बड़ी कंपनियों के खरीदार नहीं मिले उनमें एयर इंडिया और पवन हंस भी शामिल हैं. आज हम इस रिपोर्ट में ऐसी ही कंपनियों के बारे में बताने जा रहे हैं.   
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एयर इंडिया
पिछले साल घाटे में चल रही सावर्जनिक क्षेत्र की एयरलाइन एयर इंडिया को भी सरकार ने बेचने की कोशिश की थी. दरअसल, सरकार एयर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती थी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका और सरकार को एयर इंडिया की विनिवेश की प्रक्रिया को ठंडे बस्‍ते में डालना पड़ा. बता दें कि सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया पर मौजूदा वित्त वर्ष में 9000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने की तलवार लटक रही है.
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पवन हंस

इसके साथ ही सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की हेलीकॉप्टर कंपनी पवन हंस को भी बेचना चाहती है लेकिन अब तक कोई खरीदार नहीं मिल सका है. पवन हंस को बेचने के लिए कई खरीदार सामने तो आए लेकिन किसी ने वित्‍तीय बोली जमा नहीं कराई. एक बार सरकार ने कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी और ओएनजीसी को 49 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखने की अनुमति दी थी. लेकिन हाल ही में ओएनजीसी अपनी 49 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए तैयार है.

ओएनजीसी का निदेशक मंडल 49 फीसदी हिस्सेदारी को उसी कीमत पर बेचने को सहमत है, जिस भाव पर 51 फीसदी के लिए बोली लगेगी. बता दें कि पवन हंस के बेड़े में 50 हेलीकॉप्टर हैं. इनमें अधिकतर हेलीकॉप्‍टर चार्टर सेवाएं, बचाव कार्य, स्‍पेशल चार्टर के अलावा नेताओं या सेलेब्‍स को लाने-ले जाने के कार्य में इस्‍तेमाल होते हैं.
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स्कूटर इंडिया
लंबे समय से सरकार पब्लिक सेक्टर कंपनी स्कूटर इंडिया में अपना स्टेक बेचने के रास्ते ढूंढ रही है. इसके अलावा हिंदुस्तान फ्लूरोकार्बन्स, हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट, भारत पंप्स ऐंड कंप्रेशर्स, ब्रिज एंड रूफ कंपनी, हिंदुस्तान फैब और प्रोजेक्ट्स ऐंड डेवलपमेंट इंडिया को भी सरकार बेचने का प्रयास कर रही है. इनमें अधिकतर कंपनियां घाटे में चल रही हैं.
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बदहाल इंडिया पोस्‍ट-BSNL

इसके अलावा सरकारी क्षेत्र की इंडिया पोस्ट (भारतीय डाक) और टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल लगातार घाटे में हैं. वित्त वर्ष 2018-19 में इंडिया पोस्ट को कुल 15,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. पिछले तीन वित्त वर्ष में इंडिया पोस्ट का घाटा बढ़कर 150 फीसदी की बढ़त हुई है. अब यह सबसे ज्यादा घाटे वाली सरकारी कंपनी हो गई है. इसी तरह बीएसएनल पर बीते वित्‍त वर्ष में 12 हजार करोड़ का घाटा होने का अनुमान है.
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90,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य

बता दें कि वित्त मंत्रालय ने सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (सीपीएसई) से ऐसी सम्पत्तियों की सूची जल्द से जल्द तैयार करने को कहा है जिन्हें बेचा जा सकता है. इसके साथ ही उन्हें इसके लिए संभावित निवेशकों और बोलीदाताओं से बात शुरू करने को भी कहा गया है.
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बता दें कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सीपीएसई विनिवेश के जरिये 90,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वित्त वर्ष में 85,000 करोड़ रुपये था.
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