एटीएम से पैसे विद्ड्रॉ करना आपके लिए आने वाले दिनों में महंगा साबित हो सकता है. मौजूदा समय में लगभग सभी बैंक 3 से 4 लेन-देन के लिए आप से कोई चार्ज नहीं लेते हैं. लेकिन आने वाले दिनों में इसमें बदलाव हो सकता है.
दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे पुराने सिस्टम पर चल रहे एटीएम को अपग्रेड करें. इस मांग के बाद कंफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMI) ने केंद्रीय बैंक से फी स्ट्रक्चर में बदलाव करने की मांग की है.
कंफेडरेशन का कहना है कि पुराने एटीएमों को नये सिरे से रिकंफिगर करने की वजह से उनका खर्च 25 फीसदी से ज्यादा बढ़ जाएगा. यह खर्च पहले ही नुकसान झेल रही एटीएम इंडस्ट्री का बोझ बढ़ा देगा.
इंडस्ट्री ने इसके साथ ही कहा कि एटीएम को अपग्रेड करने की ज्यादा जिम्मेदारी बैंकों की है. क्योंकि इसकी वजह से उनका ऑपरेशनल कॉस्ट 40 फीसदी तक बढ़ सकता है.
बैंक अपने इस बढ़े हुए खर्च को ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं. इसके लिए देश के बैंक एटीएम से फ्री ट्रांजैक्शन कम अथवा खत्म करने और चार्ज बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं.
एटीएम इंडस्ट्री का कहना है कि ट्रांजैक्शन फी 15 रुपये ही है. जो 2012 में तय की गई थी. इसके बाद इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. CATMI के डायरेक्टर जनरल ललित सिन्हा ने कहा कि वाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर्स पहले वित्तीय दबाव में है. आरबीआई गाइडलाइन को पूरा करने के लिए हमें और ज्यादा निवेश करना होगा. इससे हमारा खर्च बढ़ेगा.
ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अगर आरबीआई एटीएम को अपग्रेड करने की जिम्मेदारी बैंकों पर डालता है, तो संभव है कि बैंक अपना खर्च कम करने के लिए एटीएम फीस बढ़ाएं व फ्री ट्रांजैक्शन में भी कमी करें. (सभी फोटो प्रतीकात्मक)