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हर मौसम में चीन बॉर्डर तक पहुंचाएगी ये टनल, बजट में पैसा आवंटित

सेला दर्रा तवांग और पश्चिम कामेंग जिलों के बीच सीमा पर पर्वतीय दर्रा है. इस दर्रे को लंबे समय से चीन दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है. इस वजह से दोनों देशों के बीच इसे लेकर विवाद बना हुआ है.

सेला दर्रे पर बनेगी टनल. सेला दर्रे पर बनेगी टनल.

मोदी सरकार के अंतिम पूर्ण बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अरुणाचल प्रदेश में एक ऐसी टनल बनाने का ऐलान किया है, जो चीन को टक्कर देने के लिए भारत का बड़ा कदम साबित होगा.

दरअसल, वित्त मंत्री ने अरुणाचल प्रदेश में स्थित तवांग में सैनिकों की तीव्र आवाजाही करने के लिए 13,700 फुट की ऊंचाई पर सेला दर्रे में टनल बनाने की घोषणा की है. सरकार ने यह प्रस्ताव ऐसे समय लाया है, जब डोकलाम को लेकर चीन और भारत के बीच तनाव चल है.

बता दें कि सेला दर्रा तवांग और पश्चिम कामेंग जिलों के बीच सीमा पर पर्वतीय दर्रा है. इस दर्रे को लंबे समय से चीन दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है. इस वजह से दोनों देशों के बीच इसे लेकर विवाद बना हुआ है.

सरकार का कहना है कि सेला दर्रा बनने से चीन सीमा पर सैनिकों को तैनात करने में आसानी होगी. इसके अलावा टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा. सबसे पहले सेला दर्रा तब सुर्ख़ियों में आया था जब 1962 के युद्ध के दौरान चीनी सैनिक इस दर्रे के जरिये भारत में घुस आए थे. हालांकि, अब यहां भारतीय सैनिकों का कड़ा पहरा है.

2017 में हुई थी टनल बनाने की प्लानिंग

'द बॉर्डर रोड ओर्गनाइजेशन' ने जुलाई 2017 में इस टनल को बनाने की घोषणा की थी. जिसे अब जाकर बजट में मंजूरी मिली है. बता दें कि सेला दर्रे में दो टनल बनेंगी, जो 4,170 मीटर की ऊंचाई से गुजरेगी. इससे तवांग से यहां पहुंचने के लिए 10 किमी का अंतर कम हो जाएगा.

फिलहाल सेना यहां पहुंचने के लिए हेलिकॉप्टर पर निर्भर है. लेकिन बर्फबारी के दौरान पहुंचना मुश्किलों भरा होता है. BRO प्रोजेक्ट वर्तक इस टनल के लिए जमीन का अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरु कर दी है. सेला दर्रे पर बनने वाली दोनों टनल की लम्बाई 475 और 1790 मीटर होगी.

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