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बजट

कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट की सीमा 5 हजार, जानें- रिजर्व बैंक के ऐलान की बड़ी बातें

मौद्रिक नीति कमिटी (MPC) की बैठक के नतीजे आ गये
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौद्रिक नीति कमिटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के नतीजे आ गये हैं. RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा कर दी है. आइए जानते हैं कि कमिटी की बैठक के प्रमुख नतीजे क्या रहे

ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं
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ब्याज दरों में बदलाव नहीं: अपनी मौ​द्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. यानी आम लोगों को उनके लोन ईएमआई पर राहत नहीं मिली है. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 4% और रिवर्स रेपो रेट को 3.35% पर बरकरार रखा है. 

कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट 5 हजार तक
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कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट 5 हजार तक होगा: RBI ने कहा है कि कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट को 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया जाएगा. यह फैसला 1 जनवरी 2021 से लागू होगा. वहीं, अगले कुछ दिनें में RTGS के जरिये पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा 24 घंटे मिलने लगेगी. 

इकोनॉमी में सुधार
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इकोनॉमी में तेज सुधार: रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में आर्थिक ग​तिविधियां बढ़ रही हैं. रिकवरी में कुछ नए सेक्टर भी जुड़े हैं. अनलॉक के बाद शहरी मांग में इजाफा हुआ है. देश का कंज्यूमर काफी आशावादी है. सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है. इकोनॉमी में अनुमान से तेज रिकवरी दिखी है. इस वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ मानइस 7.5% रहेगी यानी इसमें गिरावट आएगी. अगली तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 0.1 फीसदी है. चौथी तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 0.7 फीसदी है. 

महंगाई की दर अभी ऊंची बनी रहने की आशंका
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महंगाई दर ऊंची रहेगी: शक्तिकांत दास ने कहा कि देश में महंगाई की दर अभी ऊंची बनी रहने की आशंका है. उन्होंने कहा कि CPI आधारित महंगाई यानी खुदरा महंगाई इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 6.8% रहने का संभावना है. वहीं, Q4 में यह 5.8% रह सकता है. रिजर्व बैंक ने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2021-22 के फर्स्ट हाफ में महंगाई दर 5.2% से 4.6% के बीच रह सकती है. 

बैंकों को लाभांश न देने की छूट
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बैंकों को लाभांश न देने की छूट: मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि देश के सभी कमर्शियल और कोऑपरेटिव बैंकों से कहा गया है कि वे वित्त वर्ष 2021 के लिए लाभांश (dividends) की घोषणा नहीं करें और वित्त वर्ष 2020 में कमाए गए प्रॉफिट को अपने पास बनाए रखें. RBI ने यह फैसला बैंको को मजबूती प्रदान करने के लिए किया है.