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बिहार में लैंड रिफॉर्म विभाग की बड़ी कार्रवाई! एक हफ्ते में 23 अधिकारियों पर एक्शन

बिहार सरकार के रेवेन्यू एंड लैंड रिर्फोम डिपार्टमेंट ने एक ही हफ्ते के अंदर तीसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 23 सर्किल ऑफिसर (CO) और राजस्व कर्मियों पर सजा संबंधी उपायों को मंजूरी दे दी हैं.

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बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों पर एक्शन! (Photo: ITG)
बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों पर एक्शन! (Photo: ITG)

बिहार सरकार के रेवेन्यू  एंड लैंड रिर्फोम डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. मंगलवार को विभाग ने राज्य के अलग-अलग जिलों में तैनात 8 सर्किल ऑफिसर (CO) और राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की. यह कार्रवाई रेवेन्यू  एंड लैंड रिर्फोम मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत की गई है. 

अधिकारियों ने बताया कि मंत्री ने विभागीय फाइलों पर कई सजा संबंधी उपायों को मंज़ूरी दी हैं. इसमें विभागीय कार्रवाई शुरू करना, आरोप तय करना, सैलरी इंक्रीमेंट रोकना और जांच समितियां बनाने का फैसला लिया गया है. 

विभाग ने कहा है कि सरकारी जमीन, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन), भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

किन-किन अफसरों पर हुई कार्रवाई ?

रिर्पोटस को मुताबिक, रिटायर्ड हो चुकीं पूर्व डेहरी सर्किल ऑफिसर सीमा रानी पर सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी और सरकारी जमीन के अवैध ट्रांसफर के मामले में कार्रवाई नहीं करने का आरोप है. उन पर म्यूटेशन अपील के आदेश लागू नहीं करने और नियमों के खिलाफ एक पसंदीदा कर्मचारी को फायदा पहुंचाने का भी आरोप है. उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं.  

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वहीं, औरंगाबाद के पूर्व राजस्व अधिकारी और वर्तमान में बक्सर के इटरही सर्किल ऑफिसर संतोष कुमार प्रीतम की भी सजा के तौर पर एक सैलरी इंक्रीमेंट रोक दी गई है. उन पर गैर-बंदोबस्ती जमीन को गलत तरीके से रैयती जमीन बताकर म्यूटेशन की सिफारिश करने का आरोप सही पाया गया है. इसके बाद विभाग ने गोपालगंज के बरौली के पूर्व राजस्व अधिकारी विजय कुमार सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं. उन्हें इसी साल जनवरी में निगरानी जांच ब्यूरो ने कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था. घटना के बाद से फिलहाल वो सस्पेंड है.

इसके साथ ही, एक अन्य बड़े मामले में पूर्व मोतीपुर सर्किल ऑफिसर रुचि कुमारी पर बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) की जमीन का म्यूटेशन अवैध रूप से किसी निजी व्यक्ति के नाम पर करने का आरोप है. मामले की जांच के लिए मुख्यालय स्तर पर दो सदस्यीय समिति बनाई गई है. बेगूसराय के साहेबपुर कमाल के पूर्व प्रभारी सर्किल ऑफिसर और वर्तमान में सुपौल में अतिरिक्त जिला भूमि अर्जन पदाधिकारी चंदन कुमार पर बाढ़ राहत फंड में 11.47 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप है. उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है.

यह भी पढ़ें: बिहार में 50 लाख से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी, सरकारी योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ

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बगहा-1 के सर्किल ऑफिसर उदय शंकर मिश्रा पर बिना फिजिकल वेरिफिकेशन किए गैर-बंदोबस्ती जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कर म्यूटेशन मंजूर करने का आरोप है. रामगढ़वा के सर्किल ऑफिसर राजा कुमार पर भ्रष्टाचार, बिचौलियों के जरिए रिश्वत लेने और भूमि सुधार से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा नहीं करने के आरोप लगे हैं. 

इसी तरह, रामनगर के पूर्व सर्किल ऑफिसर और वर्तमान में पश्चिम चंपारण के भूमि अधिग्रहण कार्यालय में राजस्व अधिकारी-सह-कानूनगो के पद पर तैनात विनोद कुमार मिश्रा के खिलाफ भी जमीन के खाते में बदलाव करने और गैर-बंदोबस्ती जमीन के मामलों में म्यूटेशन मंजूर करने का आरोप है. 

अधिकारियों पर ताबड़तोड़ एक्शन...

विभाग ने एक हफ्तें के अंदर तीसरी बड़ी कार्रवाई की है. इससे पहले, 27 मई को 14 सर्किल ऑफिसर और राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. वहीं, 1 जून को सासाराम सदर के सर्किल ऑफिसर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी. ताजा कार्रवाई के बाद पिछले एक हफ्तों में कुल 23 अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है.

रेवेन्यू  एंड लैंड रिर्फोम मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा, "सरकारी जमीन की सुरक्षा, राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त सेवाएं देना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है. अनियमितताओं की लगातार निगरानी की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी."

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