India-EU FTA deal impact Defender Price: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बीते 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA Deal) फाइनल हुआ है. इस डील के सील होते ही इस बात की चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि, अब भारत में लग्जरी कारें सस्ती हो जाएंगी. खास तौर पर चर्चा में है दमदार एसयूवी लैंड रोवर डिफेंडर. हालांकि, इससे पहले भारत-यूके एफटीए के समय भी ऐसे ही कयास लगाए गए थे, लेकिन तब डिफेंडर की कीमतों में कोई राहत नहीं मिली थी. लेकिन इस बार मामला कहीं, आगे बढ़ गया है. आइये समझते हैं कि इस बार क्या बदलेगा और क्या नहीं.
भारत-यूके एफटीए लागू होने के बाद कुछ रेंज रोवर मॉडल्स की कीमतों में कटौती जरूर हुई थी, लेकिन डिफेंडर इससे बाहर रही. इसकी वजह साफ थी. लैंड रोवर डिफेंडर यूके में नहीं, बल्कि स्लोवाकिया में बनती है. इसलिए उस पर यूके एफटीए का फायदा लागू ही नहीं हो सका. अब भारत-ईयू एफटीए के बाद उम्मीद जगी है कि डिफेंडर पर आयात शुल्क कम हो सकता है.
नए समझौते के तहत आयात शुल्क में बड़ी कटौती जरूर की गई है, लेकिन यह फायदा सिर्फ उन कारों को मिलेगा जो पूरी तरह बनी हुई गाड़ियां यानी सीबीयू के रूप में भारत आती हैं. लैंड रोवर डिफेंडर भी इसी कैटेगरी में आती है. यही वजह है कि इस एसयूवी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है.
भारत में लैंड रोवर डिफेंडर 110 की एक्स-शोरूम कीमत करीब 1.03 करोड़ रुपये है. इसकी बेस कॉस्ट एंड फ्रेट यानी BCF करीब 35 लाख रुपये मानी जाती है. इस पर फिलहाल 110 फीसदी का इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, जो करीब 38.5 लाख रुपये के आसपास बैठती है. इसके बाद पूरी रकम पर लगभग 40 फीसदी जीएसटी लगता है, जो करीब 29 लाख रुपये होता है. इसी वजह से इसकी कीमत 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाती है.
अगर इंपोर्ट ड्यूटी 40 फीसदी कर दिया जाता है, तो डिफेंडर पर करीब 14 लाख रुपये का ड्यूटी चार्ज लगेगा और जीएसटी करीब 19.6 लाख रुपये हो जाएगी. ऐसे में इसकी एक्स-शोरूम कीमत घटकर लगभग 68.6 लाख रुपये हो सकती है. वहीं, एफटीए के अंतिम चरण में जब इंपोर्ट ड्यृटी 10 फीसदी तक आ जाएगा, तब डिफेंडर की एक्स-शोरूम कीमत करीब 53.9 लाख रुपये तक आ सकती है.
इतनी बड़ी कटौती के बाद भी लैंड रोवर डिफेंडर पूरी तरह से टोयोटा फॉर्च्यूनर से सस्ती नहीं होगी. फिलहाल फॉर्च्यूनर की कीमतें 34.16 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 49.59 लाख रुपये तक जाती हैं. यानी 10 फीसदी टैरिफ के बावजूद डिफेंडर उससे थोड़ी महंगी ही रहेगी.
यह समझना जरूरी है कि आयात शुल्क में यह कटौती एकदम से लागू नहीं होगी. अभी ड्यूटी 110 फीसदी से घटकर 40 फीसदी हुई है और आगे चलकर यह 10 फीसदी तक जाएगी, लेकिन यह फेज़्ड मैनर (चरणबद्ध तरीके से) में लागू होगी. साथ ही, यह छूट सिर्फ शुरुआती 2.5 लाख इंपोर्टेड कारों ही मिलेगी. इसके अलावा, यह फायदा केवल CBU मॉडल्स को ही मिलेगा. इंडिया–ईयू एफटीए को पूरी तरह लागू होने में एक साल से ज्यादा का समय लग सकता है और नई कीमतों का असर 2028 के आसपास ही दिखने की उम्मीद है.