aajtak.in में बतौर डिप्टी एडिटर काम कर रहे अभिषेक भट्टाचार्य हिंदी पत्रकारिता के दुर्लभ ‘बेंग्लो-यूपियन’ स्पीसीज से ताल्लुक रखते हैं. पिछले 6 साल से ज्यादा वक्त से वह इस डिजिटल न्यूज़रूम की रणनीति और संचालन का हिस्सा रहे हैं. उनके लिए डिजिटल पत्रकारिता एक कला है, जहां कंटेंट, रणनीति और टेक्नोलॉजी साथ चलते हैं. वे न्यूज़रूम के उस इंजन की तरह हैं, जो खबरों के छपने के बाद उनको दिशा, रफ्तार और सही मंजिल देता है. उन्हें डेटा में छिपे संकेत पढ़ना पसंद है. नए टूल सीखना और बदलते मीडिया के साथ खुद को और टीम को ढालना उनकी आदत है.
अभिषेक न्यूजरूम में एक पुल की तरह काम करते हैं, जो टेक, प्रोडक्ट और डिजाइन टीमों को एडिटोरियल से जोड़ते हैं. मुश्किल सिस्टम को आसान बनाना उनकी खासियत है. वे टीम की जरूरतों को समझते हैं और उन्हें तुरंत हल करते हैं. बड़े इवेंट्स की कवरेज हो या CMS अपग्रेड, या फिर ऐप में नए फीचर्स जोड़ना, हर काम को जमीन पर उतारते हैं. वह टीम के प्रदर्शन पर भी नजर रखते हैं और आंकड़ों की भाषा को आसान बनाकर उनका दिशा-निर्देशन भी करते हैं. वह न्यूज़रूम में AI और ऑटोमेशन को भी आगे बढ़ा रहे हैं. इससे काम तेज हुआ है और टीम की क्षमता भी बढ़ी है. वह डिजिटल न्यूज़रूम की ‘अनिवार्य बुराई’ यानी SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) को भी समझते हैं, और उसी के सहारे बड़े मौकों पर रिकॉर्ड यूजर ट्रैफिक हासिल करते आए हैं.
करीब दो दशक के अनुभव के साथ अभिषेक का सफर लंबा और विविध रहा है. इस दौरान इंडियन एक्सप्रेस समूह की वेबसाइट Jansatta.com, टाइम्स इंटरनेट की वेबसाइट NBT.in, दैनिक भास्कर ग्रुप वेबसाइट Bhaskar.com के अलावा NBT और अमर उजाला जैसे अखबारों में काम किया है. डिजिटल और प्रिंट दोनों की गहराई को करीब से समझा है. वहीं, कुछ वक्त के लिए लखनऊ स्थित दीक्षा एडवर्टाइजिंग में काम करने के दौरान एडवर्टाइजिंग को भी समझने की कोशिश की. इसके अलावा, 92.7 बिग एफएम और रेडियो सिटी के साथ शुरुआती ट्रेनिंग कर आवाज की दुनिया का भी अनुभव लिया. इन सभी पड़ावों ने उन्हें कंटेंट, ऑडियंस और प्लेटफॉर्म की बदलती जरूरतों को समझने की मजबूत नजर दी.
लखनऊ विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और मास्टर्स करने वाले अभिषेक की जड़ें यूपी के देवरिया जिले के भाटपार रानी से जुड़ी हैं. जन्म से बंगाली हैं, लेकिन उनकी पहचान में पूर्वी यूपी और बिहार की भाषा और संस्कृति भी शामिल है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शादी ने इस मिश्रण को और खास बना दिया है. खान-पान और आत्मसम्मान प्रिय अभिषेक इन दिनों ‘नेटफ्लिक्स लिटरेचर’ को समझने में व्यस्त हैं. गाड़ियों का शौक नया है और फिलहाल थार चलाना उन्हें रास आ रहा है.