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हापुड़ से ह्यूस्टन तक रथयात्रा! जगन्नाथ मंदिर प्रशासन क्यों उठा रहा है सवाल

पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन और उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में प्रस्तावित असमय रथ यात्राओं का विरोध किया है. मंदिर प्रशासन ने कहा है कि रथ यात्रा केवल धार्मिक शास्त्रों और मंदिर के रीति-रिवाजों के अनुसार निर्धारित तिथियों पर ही आयोजित होनी चाहिए.

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जगन्नाथ रथयात्राएं अब जगह-जगह पर आयोजित हो रही हैं
जगन्नाथ रथयात्राएं अब जगह-जगह पर आयोजित हो रही हैं

क्या रथ यात्रा कभी भी और कहीं भी हो सकती है! यही मुख्य आपत्ति है जिसके हवाले से पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने पहले इस्कॉन की तरफ से और अब यूपी के हापुड़ जिले में समय से पहले प्रस्तावित रथ यात्रा का विरोध किया है. दोनों प्रस्तावित आयोजनों ने भगवान जगन्नाथ से जुड़ी पारंपरिक धार्मिक परंपराओं के पालन को लेकर बहस छेड़ दी है.

18 मई को मंदिर के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने इसको लेकर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा, "यह पर्व केवल धार्मिक शास्त्रों, भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं और मंदिर के रीति-रिवाजों के अनुसार निर्धारित तिथियों पर ही मनाए जाने चाहिए." जबकि मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार हापुड़ की एक स्थानीय संस्था 'भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा सेवा समिति' ने 13 जून 2026 को नेत्रोत्सव और 14 जून 2026 को रथ यात्रा आयोजित करने की योजना बनाई है.

पाढ़ी का कहना है, "आधिकारिक मंदिर पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में भगवान जगन्नाथ का नेत्रोत्सव 14 जुलाई को मनाया जाएगा, जबकि भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई को आयोजित होगी." प्रशासन ने दोहराया कि ये तिथियां जगन्नाथ मंदिर में सदियों पुरानी परंपराओं और शास्त्रीय विधानों के अनुसार तय की गई हैं. मंदिर के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने हापुड़ के जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर प्रशासन से दखल देने और हिंदू पंचांग एवं निर्धारित मंदिर परंपराओं के अनुरूप न होने वाली तिथियों पर इन अनुष्ठानों के आयोजन को रोकने की मांग की है.

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पुरी मंदिर प्रशासन के अनुसार पंचांग के अनुसार तय तिथियों पर ही रथ यात्रा का आयोजन हो सकता है
पत्र में जिला प्रशासन से आग्रह किया गया कि आयोजकों को गैर-मान्य तिथियों पर इन पर्वों के आयोजन से रोका जाए. मंदिर प्रशासन ने कहा कि स्वीकृत अनुष्ठानिक कैलेंडर से किसी भी प्रकार का विचलन भारत और विदेशों में रहने वाले करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है.

मुख्य प्रशासक ने यह भी बताया कि पुरी के गजपति महाराज की अध्यक्षता वाली मंदिर प्रबंधन समिति पहले ही एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर चुकी है. इसमें परंपरा और शास्त्रों में निर्धारित तिथियों के अलावा अन्य दिनों में रथ यात्रा और नेत्रोत्सव मनाने का विरोध किया गया है. निर्धारित तिथियों (शुभ मुहूर्त) से पहले इन पर्वों का आयोजन भक्तों के बीच भ्रम पैदा कर सकता है. इससे देश की सबसे पूजनीय धार्मिक परंपराओं की पवित्रता भी प्रभावित हो सकती है. यह मुद्दा अब ओडिशा से बाहर भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित इस आयोजन को लेकर भक्त और धार्मिक संगठन घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं.

इसी बीच, हापुड़ स्थित 'भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा सेवा समिति' ने भी इस्कॉन से प्रेरित होकर कथित तौर पर असमय रथ यात्रा का आयोजन किया. आयोजकों ने बताया कि यह पर्व उनकी सुविधा और स्कूलों की छुट्टियों को ध्यान में रखकर आयोजित किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि वे पिछले 26 वर्षों से रथ यात्रा का आयोजन करते आ रहे हैं.

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इस्कॉन के प्रस्ताव का हो चुका है विरोध

इस्कॉन इस साल दिसंबर तक 80 रथ यात्राएं आयोजित करने की योजना बना रहा है. यह जानकारी अप्रैल में सामने आई थी और तब भी पुरी मंदिर प्रशासन की तरफ से इस मामले पर चिंता जताई गई थी.  गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव कहते हैं कि स्थापित परंपराओं से इस तरह के विचलन को रोकना ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार दोनों की जिम्मेदारी है. गजपति महाराजा ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे की जानकारी दी है. इसके जवाब में श्रीमंदिर प्रशासन राज्य और केंद्र स्तर पर संस्कृति मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के साथ चर्चा शुरू करने की तैयारी कर रहा है.

अमेरिका का ह्यूस्टन में इस्कॉन की तरफ से आयोजित रथयात्रा
अधिकारियों ने बताया कि इस्कॉन के पश्चिम बंगाल स्थित मायापुर मुख्यालय को भी दोबारा पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा गया है और कहा है कि आपत्तियों के बावजूद इस्कॉन असमय रथ यात्राओं का आयोजन जारी रखता है तो कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है. विवाद के बीच इस्कॉन ने लिखित आश्वासन दिया है कि वह भारत में असमय स्नान पूर्णिमा या रथ यात्रा का आयोजन नहीं करेगा.

इस आश्वासन के बीच बीते 18 मई को अमेरिका के ह्यूस्टन में इस्कॉन ने रथ यात्रा का आयोजन किया.  इससे ठीक एक दिन पहले यानी 17 मई को इस्कॉन की तरफ से ही दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के फ्लोरिडा में बिना अनुमति रथ यात्राओं का आयोजन किया गया था. इसको लेकर भगवान जगन्नाथ के भक्तों के विरोध को नजरअंदाज कर दिया गया. फ्लोरिडा के स्थानीय ओड़िया संगठनों ने इसका विरोध किया, वहीं जोहान्सबर्ग में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने भी इन अनधिकृत आयोजनों पर कड़ी आपत्ति जताई है.

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इस घटना ने श्रद्धालुओं के एक वर्ग में चिंता पैदा कर दी और भारत के बाहर जगन्नाथ से जुड़े पर्वों के आयोजन को लेकर इस्कॉन की कार्यप्रणाली पर बहस फिर तेज हो गई. ह्यूस्टन कार्यक्रम की तस्वीरों और वीडियो पर कई श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई है. लोगों ने सवाल उठाया कि भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को खुले वाहन प्लेटफॉर्म पर रखकर यात्रा कैसे निकाली गई. ऐसे में इस व्यवस्था को लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों और स्थापित धार्मिक मान्यताओं के पालन पर नई चिंताएं सामने आई हैं.

रिपोर्ट- आनंद दत्त

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