अमेरिका ने लगातार चौरी रात ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. वहीं, जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और वेपन स्टोरेज फैसिलिटी को निशाना बनाया.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर उभरते खतरों को खत्म करने के उद्देश्य से सीमित संख्या में सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए. हालांकि अधिकारी ने हमलों के स्थान या नुकसान के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि मंगलवार देर रात अमेरिका ने ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाने के लिए अतिरिक्त हवाई हमले शुरू किए, जिनका इस्तेमाल होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के लिए किया जा रहा था.
इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस समय मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना के 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों सैन्य विमान तैनात हैं और किसी भी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
ईरान के कई शहरों में बम धमाकों की खबर
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने हेंगाम द्वीप पर अमेरिकी प्रोजेक्टाइल गिरने की जानकारी दी. वहीं, बंदर अब्बास के आसपास भी अमेरिकी हमलों की पुष्टि स्थानीय प्रशासन ने की. ईरान के पब्लिक ब्रॉडकास्टर IRIB ने दक्षिणी ईरान के अहवाज शहर और क़ेश्म द्वीप पर भी कई धमाकों की सूचना दी. इससे पहले 13 जुलाई को अमेरिका ने ईरान के बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास समेत कई तटीय इलाकों में मिसाइल, ड्रोन, कोस्टल डिफेंस सिस्टम और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमले किए थे.
ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के अजराक एयर बेस (Azraq Air Base) स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, सेना ने कहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ ड्रोन अभियान अंतिम जीत तक जारी रहेगा. वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि ऑपरेशन 'प्रॉमिस-2' की तीसरी लहर के तहत बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर हथियार और सैन्य उपकरणों के स्टोरेज फैसिलिटी को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया गया.
साथ ही कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर MQ-9 ड्रोन लॉन्च पैड को भी निशाना बनाने का दावा किया. आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है. ईरानी सेना ने चेतावनी दी कि जब तक अमेरिकी कार्रवाई जारी रहेगी, जवाबी हमले भी जारी रहेंगे.
ईरान ने कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन दागे
वहीं, कुवैत की सेना ने दावा किया कि उसने मंगलवार शाम देश की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल, पांच क्रूज मिसाइलों और 33 ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया. कुवैत की सेना ने आरोप लगाया कि ईरान ने देश के कई महत्वपूर्ण और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया. कुवैती सेना के मुताबिक, इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों और ड्रोन का मलबा कई जगहों पर गिरा, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा. एक नौसैनिक पोत भी हमले की चपेट में आया, जबकि चार सैन्यकर्मी घायल हो गए.
होर्मुज को लेकर ईरान ने फिर दी चेतावनी
इस बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर चेतावनी दी. उसने कहा कि यदि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी जारी रहती है तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा. आईआरजीसी ने बयान में कहा, 'जब तक अमेरिका की सैन्य मौजूदगी इस क्षेत्र में बनी रहेगी, तब तक यहां से तेल और गैस का एक भी कतरा निर्यात नहीं होगा. अमेरिकी आक्रामकता का परिणाम सिर्फ होर्मुज के खुलने में और देरी होगा.'
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