'जिनेवा में अमेरिका से क्या बात हुई, होर्मुज पर कितनी हुई प्रोगेस...' ईरान ने दी पूरी डिटेल्स

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर प्रगति हुई है. राजनीतिक स्तर की बैठक खत्म हो चुकी है, लेकिन समझौते के तकनीकी पहलुओं पर काम करने के लिए टीमें बातचीत जारी रखेंगी.

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होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर हुई चर्चा. (File Photo) होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर हुई चर्चा. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:30 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही शांति वार्ता को लेकर ईरान ने पूरी डिटेल जारी की है. ईरान का कहना है कि लगभग 18 घंटे चली इस मैराथन बैठक में दूसरे पक्ष की तरफ से किए गए वादों को लागू करने पर प्रगति हुई है. इस दौरान सिर्फ पुराने मुद्दों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए आगे की रूपरेखा भी तय की गई है. कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में न केवल पुराने वादों को लागू करने पर बात हुई, बल्कि अगले 60 दिनों के भीतर एक फाइनल समझौते पर मुहर लगाने के लिए बकायदा एक रोडमैप भी तैयार किया गया है.

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इस पूरी बातचीत का सबसे बड़ा और अहम हिस्सा समुद्री सुरक्षा से जुड़ा रहा.  न्यूज एजेंसी रॉयर्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक नया सिस्टम बनाया जाएगा. यह नया सिस्टम आने वाले दिनों में समंदर के रास्ते होने वाले व्यापार, सुरक्षा के साथ-साथ निगरानी पर भी नजर रखेगा. इस मुद्दे पर सहमति बनना क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने के लिहाज से एक बड़ी राहत माना जा रहा है.

बातचीत के नतीजों को लेकर अब्बास अराघची ने पाकिस्तान और कतर की कोशिशों की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के प्रयासों से युद्ध समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. इस समझौते के तहत ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट से पाबंदियां हटाने, समुद्री नाकेबंदी खत्म करने के साथ-साथ फ्रीज किए गए कुछ पैसों को रिलीज करने पर सहमति बनी है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इस पूरे समझौते की पहली असली परीक्षा लेबनान में बनाई गई संघर्ष-निरोधक व्यवस्था होगी, जो सीजफायर के उल्लंघन से जुड़े मामलों की निगरानी करेगी. क्योंकि लेबनान में हालात शांत रखना ही आगे की कूटनीतिक बातचीत के लिए दोनों पक्षों के बीच भरोसा बढ़ाएगा.

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इस गुप्त बातचीत को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि दोनों देश अगले 60 दिनों के भीतर एक फाइनल समझौते पर मुहर लगाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिसके लिए बकायदा एक रोडमैप भी मंजूर कर लिया गया है. इस पूरी चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी और खास वर्किंग ग्रुप्स बनाने पर भी सहमति बनी है, जो सीधे परमाणु मुद्दों तथा पाबंदियों पर काम करेंगे.

हालांकि, बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सार्वजनिक धमकियों पर ईरानी दल ने कड़ा ऐतराज जताया. इसे शुरुआती नियमों का उल्लंघन बताया गया, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर टिके रहे. इसके अलावा, होर्मुज को लेकर बातचीत के दौरान एक डायरेक्ट कम्युनिकेशन सिस्टम चालू रखने का फैसला हुआ है, जिससे किसी भी तरह की गलतफहमी से बचा जा सके और समंदर के रास्ते व्यापार पूरी तरह सुरक्षित रहे.

इस महाबैठक को सफल बनाने में कतर-पाकिस्तान ने बड़ी भूमिका निभाई है. दोनों मध्यस्थ देशों ने एक साझा बयान जारी कर बताया कि यह पूरी बातचीत बेहद सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में हुई है. इसके साथ ही दोनों देश मिलकर एक संयुक्त दस्तावेज भी जारी करेंगे. इस दस्तावेज में उन सभी प्रमुख बिंदुओं का साफ तौर पर जिक्र होगा जिन पर बातचीत के दौरान सहमति बनी है, जिससे आगे की प्रक्रिया पूरी तरह साफ हो सके.

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अभी अंतिम समझौता नहीं, तकनीकी टीमें जारी रखेंगी काम

राजनीतिक स्तर पर मुख्य प्रतिनिधिमंडलों का काम अब पूरा हो चुका है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बातचीत बंद हो गई है. जमीनी स्तर पर चीजों को लागू करने, समयसीमा तय करने और अन्य पहलुओं को संभालने के लिए दोनों पक्षों की तकनीकी टीमें आगे भी काम जारी रखेंगी. जानकारों का मानना है कि भले ही कई संवेदनशील मुद्दों की वजह से अंतिम समझौते में थोड़ा वक्त लगे, लेकिन इस बैठक ने दोनों पक्षों के बीच संवाद का एक मजबूत रास्ता खोल दिया है.

बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?

रविवार को शुरू हुई इस हाई-लेवल बैठक में दोनों तरफ से बड़े चेहरे शामिल हुए. अमेरिकी दल की कमान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के हाथों में थी. वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ बातचीत की मेज पर मौजूद रहे. मध्यस्थों के तौर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी स्विट्जरलैंड पहुंचे थे.

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