ब्रिटेन (UK) की सरकार ने किशोरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लत लगाने वाले और नुकसानदेह पहलुओं से बचाने के लिए एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है. ब्रिटिश सरकार ने बुधवार को 16 और 17 साल के किशोरों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर 'मिडनाइट कर्फ्यू' लगाने की योजना तैयार की है. इसके तहत तय समय के बीच किशोर सोशल मीडिया एक्सेस नहीं कर सकेंगे.
यह नियम पिछले महीने घोषित 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध की नीति का अगला चरण है, जिसे मार्च 2027 से लागू किया जाना है.
प्रस्तावित नियमों के तहत 16 और 17 वर्ष के किशोरों के सोशल मीडिया अकाउंट्स में डिफॉल्ट रूप से आधी रात से सुबह 6 बजे तक एक्सेस बंद रहेगा. हालांकि, वे चाहें तो इस डिफॉल्ट सेटिंग को बंद कर वयस्कों की तरह सोशल मीडिया का उपयोग कर सकेंगे.
कंपनियों को मौका दिया, लेकिन वे फेल रहे- पीएम
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा करते हुए कहा, "माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित और खुश रखना चाहते हैं, लेकिन ऑनलाइन दुनिया ने इसे बेहद मुश्किल बना दिया है. तकनीक की दिग्गज कंपनियों को सुरक्षा के कई मौके मिले लेकिन वे नाकाम रहे. इसलिए अब हम हस्तक्षेप कर रहे हैं ताकि बच्चों को उनका बचपन वापस दिया जा सके. हम 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लगाकर दुनिया में सबसे बड़ा कदम उठा रहे हैं."
18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के लिए इनफिनिट स्क्रॉलिंग के बीच अनिवार्य ब्रेक लगेगा. 16 और 17 वर्ष के किशोरों के लिए लाइवस्ट्रीमिंग और अनजान लोगों से बातचीत जैसी सुविधाएं डिफॉल्ट रूप से बंद होंगी. AI आधारित "रोमांटिक कंपैनियन" चैटबॉट्स का उपयोग केवल 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए उपलब्ध होगा. इसके अलावा अन्य AI चैटबॉट्स में भी 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के लिए अंतरंग (Intimate) फीचर्स पर प्रतिबंध लगाया जाएगा.
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ब्रिटेन के विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग (DSIT) का दावा है कि यह केवल सोशल मीडिया प्रतिबंध नहीं, बल्कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए दुनिया के सबसे व्यापक मॉडलों में से एक होगा. ब्रिटेन की प्रौद्योगिकी मंत्री लिज़ केंडल ने कहा कि टेक कंपनियां बच्चों की सुरक्षा करने में असफल रही हैं, इसलिए सरकार अब अभिभावकों को अधिक नियंत्रण देने जा रही है.
विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार ने दिया पायलट प्रोजेक्ट का हवाला
कंजर्वेटिव पार्टी की शैडो एजुकेशन सेक्रेटरी लॉरा ट्रॉट ने इस योजना में 'कर्फ्यू बंद करने' के विकल्प की आलोचना करते हुए कहा कि जब किशोर इसे खुद ही बंद कर सकते हैं, तो यह कदम बेअसर साबित होगा. हालांकि, सरकार का कहना है कि 300 से अधिक लोगों पर किए गए एक पायलट प्रोजेक्ट में यह बात सामने आई कि इस नाइट कर्फ्यू से किशोरों की नींद और पढ़ाई में एकाग्रता में बड़ा सुधार देखा गया है.
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