ब्रिटेन में घर खरीदना हुआ सपना, क्या मंदी की गिरफ्त में आ गया है देश का हाउसिंग मार्केट?

दुनियाभर के रियल एस्टेट बाजारों के लिए यह समय काफी उथल-पुथल भरा साबित हो रहा है. चीन के ऐतिहासिक संकट के बाद, अब ब्रिटेन का प्रॉपर्टी बाजार भी गंभीर चुनौतियों की चपेट में है.

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चीन के बाद अब ब्रिटेन में प्रॉपर्टी संकट, थमीं घरों की कीमतें! (Photo-Pexles) चीन के बाद अब ब्रिटेन में प्रॉपर्टी संकट, थमीं घरों की कीमतें! (Photo-Pexles)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:39 AM IST

दुनिया भर के रियल एस्टेट बाजारों के लिए यह समय काफी उथल-पुथल भरा साबित हो रहा है. चीन के ऐतिहासिक संकट के बाद, अब ब्रिटेन का प्रॉपर्टी बाजार भी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है. महंगे होम लोन, वैश्विक तनाव और घरेलू राजनीतिक अनिश्चितता ने खरीदारों के पैर पीछे खींच लिए हैं, जिससे आने वाले समय में मकानों की कीमतों में लंबे समय तक ठहराव रहने की आशंका गहरा गई है.

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एक नई आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन (UK) में घरों की कीमतें आने वाले काफी समय तक जस की तस बनी रह सकती हैं, यानी न तो वे बढ़ेंगी और न ही घटेंगी. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि देश में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल और पैसों की तंगी की वजह से लोग अब नए घर खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, जिससे प्रॉपर्टी बाजार पूरी तरह सुस्त पड़ गया है.

सर्वे के मुताबिक, बाजार का सेंटिमेंट यह इशारा करता है कि अगले तीन महीनों में मकानों की कीमतों में कोई खास हलचल देखने को नहीं मिलेगी. यह अनुमान जून में लगातार दूसरे महीने कीमतों के स्थिर रहने के बाद सामने आया है. 'नेशनवाइड' के आंकड़ों के अनुसार, जून में औसत मकान की कीमत £277,484 रही, जिसमें महंगे कर्ज के कारण कमजोर पड़ी मांग की वजह से कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला.

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मॉर्टगेज अफोर्डेबिलिटी, सबसे बड़ी चुनौती

ब्लूमबर्ग के अनुसार, इस समय हाउसिंग मार्केट के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक चुनौती होम लोन चुकाने की क्षमता की है. फिक्स्ड-रेट मॉर्टगेज की दरें तय करने का मुख्य पैमाना फाइव-ईयर स्टर्लिंग स्वैप रेट फरवरी के अंत में गिरकर करीब 3.5% पर आ गया था।, लेकिन ईरान संघर्ष बढ़ने के बाद मई के मध्य तक यह तेजी से बढ़कर लगभग 4.5% तक पहुंच गया.

कच्चे तेल और महंगाई का डबल अटैक

हालांकि बाद में कच्चे तेल की कीमतें घटने से स्वैप रेट में थोड़ी कमी आई, लेकिन सीजफायर के टिकने को लेकर उपजी चिंताओं ने कच्चे तेल के दामों को फिर से बढ़ा दिया, इसके चलते फाइव-ईयर स्वैप रेट लगभग 4.24% पर बना हुआ है. ऊर्जा ( की ऊंची कीमतों ने महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है.

महंगाई और ऊंची ब्याज दरों के इस चक्र के कारण संभावित खरीदारों की लोन लेने की क्षमता काफी सीमित हो गई है. ब्लूमबर्ग का तर्क है कि भले ही कीमतों में ठहराव आने से धीरे-धीरे मकान आम लोगों के बजट में आ सकते हैं, लेकिन यह स्थिति बड़े आर्थिक जोखिम भी पैदा करती है. प्रॉपर्टी के लेन-देन में कमी आने से लोगों की गतिशीलता प्रभावित होती है, जिससे इससे जुड़ी अन्य आर्थिक गतिविधियां भी सुस्त पड़ जाती हैं.

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घरेलू राजनीति और टैक्स का डर

ब्रिटेन के भीतर चल रही राजनीतिक अनिश्चितता एक और बड़ा रोड़ा है, जो वित्तीय बाजारों में चिंताएं बढ़ा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर चल रही चर्चाएं जैसे कि 'मेंशन टैक्स' की सीमा घटाना या व्यापक भूमि कर सुधार लागू करना, प्रॉपर्टी के लेन-देन को और कम कर सकती हैं, खासकर प्रीमियम या महंगे घरों के सेगमेंट में.

'द गार्डियन' ने भी पहले अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि रियल एस्टेट एजेंटों को उम्मीद है कि पूरी गर्मियों के दौरान कारोबार सुस्त रहेगा. बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि प्रॉपर्टी सेक्टर में कोई भी बड़ा सुधार अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में ब्याज दरों और वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों में कितनी स्थिरता आती है.
यह भी पढ़ें: ऑफिस स्पेस के लिए लोगों ने खूब लगाया पैसा, घरों में निवेश घटा, रियल एस्टेट में $4.5 अरब निवेश

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