ब्रिटेन में भी आधार जैसा 'ब्रिट कार्ड' बनाने की तैयारी, PM स्टार्मर को पसंद आया भारत का डिजिटल सिस्टम

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मुंबई दौरे के दौरान भारत के आधार डिजिटल बायोमेट्रिक आईडी सिस्टम की प्रशंसा की थी. अब यूके 'ब्रिट कार्ड' लाने पर विचार कर रही है. ब्रिट कार्ड में पारदर्शिता और नागरिक अधिकार मुख्य मुद्दे बने रहेंगे.

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ब्रिटेन के पीएम ने किया भारत के आधार सिस्टम की जमकर तारीफ (Photo: PTI) ब्रिटेन के पीएम ने किया भारत के आधार सिस्टम की जमकर तारीफ (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST

रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने हाल ही में मुंबई दौरे के दौरान भारत के आधार सिस्टम की खूब तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि वे इस सिस्टम को देखकर प्रभावित हुए हैं और इसे अपने देश की नई डिजिटल पहचान योजना ब्रिट कार्ड के लिए मॉडल बनाने की सोच रहे हैं.

आधार एक ऐसा डिजिटल आईडी नंबर है जो हर भारतीय नागरिक को मिलता है. इसमें नागरिकों की जानकारी, उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) और आंखों के निशान जैसी बायोमेट्रिक चीज़ें जुड़ी होती हैं. ये सब सरकार को मदद करता है कि सही लोगों को सरकारी लाभ पहुंचाए जाएं और घपले-फरेब कम हो. 

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ब्रिटेन की योजना कुछ अलग है. वहां का मकसद अवैध कामगारों को रोकना है ताकि सही लोगों को ही सरकारी सेवाएं मिलें. लेकिन वहां के लोगों को अपनी प्राइवेसी (निजता) को लेकर चिंता भी है और वो ज्यादा सरकारी निगरानी नहीं चाहते.

किएर स्टार्मर ने अपनी मुंबई यात्रा के दौरान इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि से भी मुलाकात की थी, जो आधार की शुरुआत करने वाले प्रमुख शख्स हैं. दोनों ने भारत के अनुभवों के आधार पर ब्रिटेन में अच्छे और सुरक्षित डिजिटल आईडी सिस्टम बनाने पर चर्चा की.

असल में, आधार ने भारत में कई सरकारी काम आसान कर दिए हैं, लेकिन इसकी वजह से प्राइवेसी के सवाल भी उठते रहे हैं. ब्रिटेन अपने सिस्टम में बायोमेट्रिक डेटा को शामिल नहीं करेगा और डेटा सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देगा. समाचार पत्र द गार्जियन को एक ब्रिटेन के सरकार के प्रवक्ता ने ये बताया है.

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यह भी पढ़ें: 'नमस्कार दोस्तों...' मोदी के सामने ब्रिटिश PM किएर स्टार्मर का इंडियन स्वैग

स्टार्मर ने बताया कि वे चाहते हैं कि डिजिटल पहचान से लोगों की रोजमर्रा की जिन्दगी आसान हो, जैसे कि नौकरी पाना, सरकारी मदद लेना आदि. हालांकि, लोगों की चिंताएं भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं.

इस पूरी बात से साफ है कि भारत का आधार मॉडल दुनिया में एक उदाहरण बन चुका है, लेकिन हर देश को अपनी जरूरत और चुनौतियां देखते हुए इसे अपनाना होता है.

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