स्वीडन में लेफ्ट गुट ने बनाई बढ़त, चुनाव के नतीजों में बड़ा फेरबदल, 174 सीटों पर सिमटा सत्तारूढ़ गठबंधन

स्वीडन के नेशनल चुनाव में विपक्षी सेंटर-लेफ्ट गठबंधन ने आंशिक मतगणना में एक सीट की बढ़त बनाई है, जिससे देश की उदारवादी विरासत पर असर पड़ सकता है. प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के दक्षिणपंथी गठबंधन और सेंटर-लेफ्ट के बीच मुकाबला बेहद करीबी है.

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स्वीडन चुनाव में सेंटर-लेफ्ट गठबंधन ने बढ़त बनाई. ( Photo- Reuters) स्वीडन चुनाव में सेंटर-लेफ्ट गठबंधन ने बढ़त बनाई. ( Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:13 AM IST

स्वीडन के नेशनल चुनाव के नतीजों में रविवार को कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. चुनाव आयोग की आंशिक मतगणना में विपक्षी सेंटर-लेफ्ट गुट को एक सीट की बढ़त मिलती नजर आ रही है, जिससे इस नॉर्डिक देश का अपनी उदारवादी विरासत से दूर जाने का सिलसिला रुक सकता है. हालांकि, वोटों की गिनती अभी जारी है.

चुनाव प्राधिकरण द्वारा 6,312 में से 4,853 चुनावी जिलों की आंशिक मतगणना के अनुसार, सोशल डेमोक्रेट्स नेता मैग्डेलेना एंडरसन के नेतृत्व वाले विपक्षी सेंटर-लेफ्ट गठबंधन को 349 सीटों वाली संसद 'रिक्सडैग' में 175 सीटें मिलने की उम्मीद है. तो वहीं प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन का सत्तारूढ़ दक्षिणपंथी गठबंधन 174 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है. ये चुनाव देश की प्रवासन (माइग्रेशन) नीतियों और क्रिस्टर्सन के धुर-दक्षिणपंथी गठबंधन के भविष्य को तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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एंडरसन की पार्टी वोट शेयर में सबसे आगे 

वोट प्रतिशत के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मैग्डेलेना एंडरसन की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी लगभग 28 प्रतिशत वोटों के साथ देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन की मॉडरेट पार्टी को करीब 19.9 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं. वहीं, सत्तारूढ़ खेमे की सहयोगी और धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'स्वीडन डेमोक्रेट्स' (SD) 17.6 फीसदी वोटों के साथ तीसरे नंबर पर बनी हुई है.

बुधवार तक साफ होगी तस्वीर

मुकाबला इतना कड़ा है कि विजेता का फैसला होने में कई दिनों का समय लग सकता है. क्रिस्टर्सन की मॉडरेट पार्टी की सदस्य और विदेश मंत्री मारिया माल्मर स्टेनरगार्ड ने कहा कि मुझे लगता है कि ये एक लंबी रात होने वाली है. उन्होंने संकेत दिया कि जब तक विदेशों में डाले गए वोट नहीं आ जाते, तब तक नतीजे स्पष्ट नहीं होंगे और अंतिम तस्वीर बुधवार तक ही साफ हो सकेगी.

क्रिस्टर्सन ने चुनाव पूर्व अपने वादे में दशकों पुरानी परंपरा तोड़ते हुए कहा था कि वह बहुमत हासिल करने के लिए स्वीडन डेमोक्रेट्स को सरकार में शामिल करेंगे. स्वीडन डेमोक्रेट्स एक धुर-दक्षिणपंथी दल है, जिसकी जड़ें नाजी आंदोलन से जुड़ी मानी जाती हैं. हालांकि, दक्षिणपंथी समर्थकों का मानना है कि इस गठबंधन से गिरोह हिंसा पर लगाम लगी है और आव्रजन में भारी कमी आई है, जबकि आलोचक इसे नागरिक स्वतंत्रताओं के खिलाफ बता रहे हैं.

उधर, स्टॉकहोम के पास रिंकेबी उपनगर में मतदान के दौरान स्वीडन डेमोक्रेट्स के नेता जिमी एकेसन ने कहा कि ये इलाका स्वीडन जैसा नहीं दिखता. यह क्षेत्र बड़ी स्वीडिश-सोमाली आबादी का घर है. चार साल पहले क्रिस्टर्सन की सरकार आने के बाद शरणार्थियों के लिए स्थायी निवास खत्म कर दिया गया था, कल्याणकारी नियमों को कड़ा किया गया था और अवैध लोगों को बाहर निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी गई थी. पार्टी का दावा है कि उसने चरमपंथियों को बाहर कर अपने अतीत के लिए माफी मांग ली है.

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एंडरसन की पार्टी को मिले 28% वोट

वहीं, अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो मैग्डेलेना एंडरसन की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी लगभग 28 प्रतिशत वोटों के साथ देश की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है. जबकि क्रिस्टरसन की मॉडरेट पार्टी को करीब 19.9% और धुर-दक्षिणपंथी स्वीडन डेमोक्रेट्स (SD) को 17.6% वोट मिलते दिख रहे हैं.

एंडरसन की वापसी पर नजर

स्वीडिश ब्रॉडकास्टर एसवीटी के ताजा अनुमानों में अंतर बेहद कम दिखने के बाद स्वीडन डेमोक्रेट्स के खेमे में उत्साह देखा गया. पार्टी के आव्रजन प्रवक्ता और सांसद लुडविग एस्पलिंग ने कहा कि वह बेहद नर्वस हैं और ऐसा लग रहा है कि उनकी लाइफ का काम दांव पर लगा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मुकाबला बेहद करीबी है और उनके पास अब भी जीतने का मौका है. हालांकि, एंडरसन का गठबंधन अपनी एक सीट की बढ़त को अंत तक बचाने में सफल रहता है तो नॉर्डिक देश में सत्ता परिवर्तन के साथ मैग्डेलेना एंडरसन की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ हो जाएगा.

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