दक्षिण अफ्रीका की गोल्ड माइनिंग कंपनी गोल्ड फील्ड्स ने गुरुवार को कहा कि ईरान युद्ध के कारण सोना निकालने की लागत बढ़ रही है. युद्ध के कारण सोने की माइनिंग में लगने वाला ईंधन और विस्फोटक महंगे हुए हैं. इस वजह से अफ्रीकी कंपनी की माइनिंग का खर्चा बढ़ रहा है.
कंपनी ने अपनी तिमाही अपडेट में कहा, 'अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो इसका अनुमानित असर पोर्टफोलियो स्तर पर 40 से 50 डॉलर प्रति औंस के बीच हो सकता है.'
हालांकि, गोल्ड फील्ड्स ने सालभर के लिए अपनी लागत अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है. कंपनी का कहना है कि उसकी खदानों में अधिक ईंधन-कुशल और उच्च क्षमता वाले ढुलाई सिस्टम जैसे उपाय लागत को नियंत्रित रखने में मदद करेंगे.
दक्षिण अफ्रीका, घाना, ऑस्ट्रेलिया, चिली और पेरू में संचालन करने वाली इस गोल्ड माइनिंग कंपनी ने कहा कि उसकी लागत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी डीजल की कीमतों में हुई है, जो 70% तक बढ़ चुकी हैं.
कंपनी के मुताबिक, माल ढुलाई की लागत में 40% का इजाफा हुआ है, जबकि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतें 30% बढ़ गई हैं. गोल्ड फील्ड्स पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की एग्न्यू खदान जैसी दूरदराज की माइनिंग साइट्स को ऊर्जा देने के लिए LNG का इस्तेमाल करती है.
साइनाइड और विस्फोटकों की लागत में भी बढ़ोतरी
कंपनी ने कहा कि विस्फोटकों और साइनाइड दोनों की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी हुई है. साइनाइड एक रसायन है, जिसे प्राकृतिक गैस जैसे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक से बनाया जाता है और इसका इस्तेमाल सोने की प्रोसेसिंग में किया जाता है.
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था जिसके बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू हुआ. इसके बाद ईरान ने ऊर्जा व्यापार के लिए अहम रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम अप्रैल के अंत तक करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे.
हालांकि, गुरुवार को तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते की संभावना जताई है. इसके बावजूद, कीमतें साल की शुरुआत की तुलना में काफी ऊंची बनी हुई हैं.
सोने की कीमतें, जो जनवरी के अंत में रिकॉर्ड 5,595 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थीं, अब काफी उतार-चढ़ाव के बाद करीब 4,744 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई हैं.
कंपनी ने 2026 की पहली तिमाही में 6.33 लाख औंस सोने का उत्पादन किया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15% ज्यादा है. चिली की सालारेस नॉर्टे खदान में उत्पादन बढ़ने से घाना की टार्कवा खदान और ऑस्ट्रेलिया की एग्न्यू तथा ग्रुएरे खदानों में कम उत्पादन की भरपाई हुई.
गोल्ड फील्ड्स को उम्मीद है कि वह 2026 में 24 लाख से 26 लाख औंस सोने का उत्पादन करेगी.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क