पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोहियों के हमले में मरने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या 42 हो गई है. ये हाल फिलहाल में पाकिस्तान में सुरक्षाबलों पर बड़ा हमला है. पहले पाकिस्तान ने कहा था कि इस हमले में 9 पुलिसकर्मियों की मौत हुई है. लेकिन तब BLA विद्रोहियों ने कई पुलिसकर्मियों को अगवा कर लिया था. अब उनकी डेड बॉडीज धीरे-धीरे सामने आ रही है. पाकिस्तान ने कहा है कि उसकी सेना के ऑपरेशन में कुल 54 विद्रोही मारे गए हैं.
इस हमले का सबसे दुखद पहलू है. हमले में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के साथ पाकिस्तान और बलूचिस्तान की सरकार का व्यवहार.
बलूचिस्तान की सरकार हमले में मारे गए पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों के शव को खुले टेम्पो में लोड कर ले जा रही है. इससे जुड़ा एक वीडियो स्थानीय व्यक्ति ने शेयर किया है. इस वीडियो में एक खुले टेम्पो में 10 पुलिसकर्मियों के शव ताबूत पर लदे हुए हैं. इस टेम्पो को बिना किसी औपचारिकता के ले जाया जा रहा है.
बता दें कि बलूचिस्तान के जियारत जिले में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी से जुड़े विद्रोहियों ने एक पुलिस चौकी पर बड़ा हमला किया. सोमवार देर रात दर्जनों हथियारबंद हमलावरों ने मंगी फेज-III इलाके में स्थित चौकी को घेर लिया, इसके बाद दोनों ओर से कई घंटे तक मुठभेड़ चली. इस हमले में तत्काल नौ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए.
शुरुआती रिपोर्टों में कुछ पुलिसकर्मियों के अगवा होने की भी बात सामने आई. इसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने व्यापक सर्च और क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया. पाकिस्तान सरकार के अनुसार इस दौरान 54 विद्रोही मारे गए.
बाद में पाकिस्तानी सेना ने बताया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान अगवा किए गए कई पुलिसकर्मियों की बॉडी मिली. इससे इस हमले में पाकिस्तान का कुल नुकसान बढ़ गया.
पाकिस्तान सरकार ने इस हमले के लिए BLA को जिम्मेदार ठहराया है और आरोप लगाया है कि संगठन को बाहरी समर्थन मिल रहा है, हालांकि इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया है.
इस हमले का वीडियो एक स्थानीय शख्स ने एक्स पर पोस्ट किया है.
इस शख्स ने एक भावुक पोस्ट लिखा है और कहा है कि
'कभी 'सनोबर का शहर' कहलाने वाला और दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सनोबर जंगलों में से एक का घर रहा जियारत आज ताबूतों के जुलूस का गवाह बन रहा है. सनोबर के ये पुराने पेड़ सदियों से खड़े हैं और चुपचाप इतिहास को बनते-बिगड़ते देख रहे हैं. आज वे एक और त्रासदी के गवाह बन रहे हैं, क्योंकि शहीद हुए पुलिसकर्मियों के शवों को ताबूतों में रखकर उनकी अंतिम विदाई के लिए ले जाया जा रहा है. '
'इस पाकिस्तान सेना और ISI की विनाशकारी नीतियों ने जूनिपर के इस शहर को ताबूतों के शहर में बदल दिया है; इन नीतियों ने बलूचिस्तान में केवल खून-खराबा, दुख और तबाही ही फैलाई है. हर ताबूत के साथ एक टूटा हुआ परिवार, मां के आंसू, विधवा का दुख और पिता के प्यार से महरूम हुए बच्चे जुड़े होते हैं.'
हमेशा की तरह पाकिस्तान ने इस हमले का आरोप अपनी सीमा के बाहर की ताकतों पर लगाया है.
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