क्रिप्टो 'हराम' है... PAK के कट्टर मौलाना का फतवा और ट्रंप की कमाई की प्लानिंग को लगा पलीता!

पाकिस्तान के इस मौलाना का ये फतवा ठीक उसी समय आया है जब इस्लामाबाद ट्रंप फैमिली के क्रिप्टो वेंचर को प्रमोट कर रहा था, अब सुन्नी विचारधारा को पालन करने वाले इस कट्टर मौलाना ने कहा है कि हर तरह का क्रिप्टोकरेंसी इस्लाम के अनुसार हराम है और इसमें लेन-देन नहीं करना चाहिए.

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इस्लामी विद्वान मोहम्मद तक़ी उस्मानी ने क्रिप्टोकरेंसी को 'हराम' कहा है. (Photo: ITG) इस्लामी विद्वान मोहम्मद तक़ी उस्मानी ने क्रिप्टोकरेंसी को 'हराम' कहा है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:58 PM IST

पाकिस्तान में क्रिप्टो बिजनेस को एक मौलाना ने 'हराम' घोषित कर दिया है. यहां क्रिप्टोकरेंसी का इकोसिस्टम डेवलप हो ही रहा था कि मजहबी गलियारों में दबदबा रखने वाले एक मौलवी ने इसके खिलाफ फतवा जारी कर दिया. और इसे इस्लामी नियमों के तहत 'हराम' करार दे दिया है. 

पाकिस्तान के कराची में स्थित दारुल उलूम कराची के प्रमुख इस्लामी विद्वान मुफ्ती मोहम्मद तक़ी उस्मानी ने क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग को पूरी तरह हराम करार देते हुए बिटकॉइन, एथेरियम, USDT (Tether) समेत सभी स्टेबलकॉइन्स और ब्लॉकचेन टोकन को हराम बताया है. और शरीयत के अनुसार इसे संपत्ति न मानते हुए उनके खरीद-बिक्री को नाजायज बताया गया है. 

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यह फतवा ठीक उसी वक्त सामने आया है जब पाकिस्तान सरकार ट्रंप परिवार की क्रिप्टो कंपनी World Liberty Financial (WLF) के साथ मिलकर डिजिटल एसेट्स को प्रमोट करने की कोशिश कर रही थी. पूंजी की तलाश में मुल्क दर मुल्क भटकते पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर पिछले कुछ दिनों से अपने वर्चुअल एसेट्स सेक्टर को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं. 

मौलाना के इस फतवे से ट्रंप और मुनीर इन दोनों की कमाई की प्लानिंग को तगड़ा पलीता लग सकता है. मुफ़्ती मुहम्मद तकी उस्मानी द्वारा जारी किया गया फ़तवा पाकिस्तान के सबसे सम्मानित सुन्नी इस्लामिक शिक्षण संस्थानों में से माना जाता है और पाकिस्तानी की बड़ी आबादी इस पर अमल करती है. 

पहले इस फतवे को समझिए

कराची के इस मदरसे के अनुसार इस फ़तवे का समर्थन कई अन्य इस्लामिक विद्वानों ने भी किया है. इस फ़ैसले में क्रिप्टोकरेंसी, क्रिप्टो टोकन और स्टेबलकॉइन शामिल हैं.

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इसमें कहा गया है कि ऐसी डिजिटल संपत्तियां धन या संपत्ति की इस्लामिक परिभाषा पर खरी नहीं उतरती हैं, इसलिए शरिया के तहत इनकी खरीद-बिक्री की अनुमति नहीं है. इसमें आगे कहा गया है कि क्रिप्टोकरेंसी, वर्चुअल करेंसी, टोकन और स्टेबलकॉइन जैसे अलग-अलग शब्द डिजिटल संपत्तियों की एक ही श्रेणी को दर्शाते हैं, और केवल शब्दावली बदलने से धार्मिक फ़ैसला नहीं बदलता है.  इसलिए यह फ़ैसला न केवल बिटकॉइन और एथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी पर लागू होता है, बल्कि ब्लॉकचेन-आधारित टोकन और स्टेबलकॉइन (जिसमें USDT/Tether भी शामिल है) पर भी लागू होता है. 

इस फतवे की टाइमिंग अहम है

यह फतवा ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तानी सरकार क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर के विकास को बढ़ावा दे रही है. पिछले साल, सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों को लाइसेंस देने और देश के फाइनेंशियल सिस्टम में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को शामिल करने के लिए 'पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी' (PVARA) बनाने की घोषणा की थी. सरकार ने वर्चुअल एसेट्स के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भी पेश किया है, जिससे लाइसेंस-प्राप्त क्रिप्टो इंडस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है. 

जनवरी 2026 में ट्रंप की क्रिप्टो कंपनी ने पाकिस्तान के साथ समझौता किया था.

सरकार ने  बिटकॉइन माइनिंग के लिए बिजली भी आवंटित की. सरकार का तर्क है कि इससे विदेशी निवेश आएगा, पाकिस्तानी रुपया मजबूत होगा और युवाओं को नौकरियां मिलेंगी.  लेकिन धार्मिक लॉबी और कट्टर उलेमा इस प्रक्रिया को “इस्लाम के खिलाफ” बताते रहे हैं. 

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पाकिस्तान से ट्रंप की कमाई की प्लानिंग को पलीता

ट्रंप ने क्रिप्टो की बिजनेस से कमाई करने के लिए एक कंपनी बनाई है. इस कंपनी का नाम WLF यानी कि वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल है. यह डोनाल्ड ट्रंप और उनकी फैमिली की क्रिप्टो कंपनी है. इस कंपनी को मुख्य रूप से ट्रंप परिवार के सदस्य डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, एरिक ट्रंप और उनके करीबी पार्टनर्स चलाते हैं. कंपनी का मुख्य प्रोडक्ट USD1 नाम का डॉलर-पेग्ड स्टेबलकॉइन है. 

पाकिस्तान ने जनवरी 2026 में WLF की सहयोगी कंपनी SC Financial Technologies के साथ MoU साइन किया था. इस समझौते के तहत WLF का USD1 स्टेबलकॉइन पाकिस्तान में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स के लिए इस्तेमाल करने की बात कही गई थी.  WLF के CEO जैक विटकॉफ ने खुद इस्लामाबाद आकर इस डील पर साइन किया था. इस दौरान  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आर्मी चीफ आसिम मुनीर और वित्त मंत्री मौजूद थे. 

ट्रंप परिवार को 2025 में WLF से अकेले टोकन सेल्स से 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा का फायदा हुआ था. 

इस कंपनी ने पाकिस्तान को अपना गवर्नेंट पार्टनर बनाकर अपनी वैधता और मार्केट पहुंच बढ़ाने की कोशिश की थी. 

अब मुफ्ती तक़ी उस्मानी का फतवा इस पूरे आइडिया पर पानी फेर सकता है. USD1 स्टेबलकॉइन भी फतवे की जद में आ गया है, जिससे पाकिस्तान में इसका लोकल यूज बेहद मुश्किल हो जाएगा. 

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हालांकि फतवा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन पाकिस्तान जैसे देश में मजहबी फतवों का सामाजिक और सांस्कृतिक असर बहुत गहरा होता है. लाखों-करोड़ों आम मुसलमान अब क्रिप्टो ट्रेडिंग को हराम समझ सकते हैं और सार्वजनिक रूप से इसका इस्तेमाल करने से हिचक सकते हैं. 

ट्रंप प्रशासन के लिए पाकिस्तान के साथ क्रिप्टो डील सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि डिप्लोमेसी का हिस्सा थी. पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज के लिए नामांकित किया. बदले में ट्रंप परिवार की क्रिप्टो कंपनी को सपोर्ट मिला. अब अगर पाकिस्तान में क्रिप्टो एडॉप्शन रुक गया तो WLF की ग्रोथ प्रभावित होगी. इससे ट्रंप की कमाई का जो पाकिस्तान कार्ड था, वह कमजोर पड़ सकता है. 

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