'कश्मीर छोड़ो, सब्सिडी तुम्हारे मुंह पर मारेंगे', PoK में PAK के खिलाफ बगावत, भारत से ट्रेड की मांग

PoK में शुरू हुआ आंदोलन अब पाकिस्तान के शासन को खुली चुनौती देने लगा है. रावलकोट में हुई एक सभा में आंदोलनकारी नेता सरदार अमन कश्मीरी ने पाकिस्तान से क्षेत्र छोड़ने की मांग करते हुए सब्सिडी ठुकराई और भारत के साथ व्यापारिक रास्ते खोलने की बात कही है.

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असीम मुनीर पर फूटा लोगों का गुस्सा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में थम नहीं रहा आक्रोश. (File Photo: ITG) असीम मुनीर पर फूटा लोगों का गुस्सा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में थम नहीं रहा आक्रोश. (File Photo: ITG)

सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:11 PM IST

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बिजली के बिलों, गेहूं की कीमतों और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन चरम पर है. जो आंदोलन कभी सब्सिडी, महंगाई और प्रशासनिक नीतियों के विरोध तक सीमित था, वो अब पाकिस्तान की भूमिका, उसके प्रशासनिक नियंत्रण और सैन्य प्रतिष्ठान पर सीधे सवाल उठाने लगा है.

रावलकोट में आयोजित एक बड़ी सभा में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ तीखे तेवर दिखाए. इस दौरान आंदोलनकारी नेता सरदार अमन कश्मीरी ने इस्लामाबाद और पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है.

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उन्होंने कहा, "हम तुम्हारे मुंह पर मारते हैं सब्सिडी. तुम रियासत से बाहर निकलो. रियासत के सारे मसाइल हमारे हवाले करो. हम जाने हिन्दुस्तान जाने, जम्मू-कश्मीर जाने, हमारा मसला है, हमारा मुल्क है. हम जाने हमारा काम जाने, तुम्हारा क्या काम है?" उनका बयान पाकिस्तान के प्रशासनिक नियंत्रण को सीधी चुनौती है.

VIDEO में सुनिए आंदोलनकारी नेता सरदार अमन ने क्या...

PoK में अशांति की जड़ें 2024 और 2025 में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी हैं. शुरुआत में प्रदर्शनकारी बिजली के ऊंचे टैरिफ, खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और इस्लामाबाद की कथित भेदभावपूर्ण आर्थिक नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे. इसके बाद पाकिस्तान को गेहूं पर सब्सिडी और बिजली दरों में राहत जैसे कदम उठाने पड़े. 

आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि ये राहत उपाय सिर्फ अस्थायी हैं. इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संसाधनों पर नियंत्रण और आर्थिक अधिकारों से जुड़े मूल सवालों का समाधान नहीं होता. इसी वजह से हाल के महीनों में आंदोलन का स्वरूप बदलता गया. पाकिस्तान के प्रशासनिक नियंत्रण को चुनौती देने वाले आंदोलन में तब्दील हो गया. 

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'यदि आप हमारा राशन रोकेंगे, तो हम दूसरे व्यापार के रास्ते खोल देंगे', रावलकोट की सभा में बोलते हुए सरदार अमन कश्मीरी ने पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान पर आरोप लगाया कि वह आर्थिक दबाव बनाकर आंदोलन को कमजोर करना चाहता है. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान हमारा राशन रोक रहा है. हमारे दूसरे ट्रेड रूट भी हैं. वे खोल देंगे."

उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब लोग वैकल्पिक रास्तों की तलाश के लिए तैयार हैं. उनके मुताबिक, व्यापारिक रास्ते चाहे पाकिस्तान के जरिए खुलें या भारत के जरिए, लोगों को आर्थिक अवसर मिलने चाहिए. सरदार ने पाकिस्तानी सब्सिडी को भी सिरे से खारिज कर दिया. 

सरदार अमन ने कहा कि PoK के लोग इस्लामाबाद की आर्थिक मदद पर निर्भर नहीं हैं. उन्होंने कहा, "हम तुम्हारी सब्सिडी अपने मुंह पर नहीं लगाते, बल्कि तुम्हारे मुंह पर मारते हैं. हमारे राज्य से चले जाओ." उन्होंने आगे मांग की है कि पाकिस्तान क्षेत्र के सभी प्रशासनिक और राजनीतिक मामलों का नियंत्रण स्थानीय लोगों को सौंप दे.

उन्होंने कहा, "राज्य छोड़ दो. इसके सारे मामले हमें सौंप दो. चाहे हम भारत से डील करें, जम्मू-कश्मीर से बात करें या अपने मामले खुद संभालें, यह हमारा मामला है और हमारा देश है." उनके भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा भारत के साथ व्यापारिक रास्ते खोलने की अपील रही. उन्होंने कहा कि लोगों को दूसरे विकल्प तलाशने होंगे.

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सरदार ने पाकिस्तान की उस दलील को भी चुनौती दी जिसमें वो अपनी सैन्य मौजूदगी को उचित बताता है. उन्होंने कहा, "भारत के खिलाफ बचाव करना हमारा मुद्दा है, आपका नहीं." इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान पर स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का आरोप लगाया. उनका कहना था कि उनके संसाधनों का दोहन हो रहा है.

विशेषज्ञों की नजर में ये बयान इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे केवल आर्थिक राहत की मांगों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के दशकों पुराने राजनीतिक नैरेटिव को भी चुनौती देते हैं. पाकिस्तान खुद को कश्मीरी आत्मनिर्णय का समर्थक बताता रहा है. लेकिन PoK के भीतर उभरती आवाजों को दबाने का काम कर रहा है.

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